भजन-संहिता 45:1-16 CGOCV2024 - Bible AI

1मोर हिरदय म एक ठन उत्तम बिसय आवत हे

2तेंह मनखेमन म सबले उत्तम अस

3हे बलसाली मनखे, तेंह अपन बाजू म तलवार ला धर ले;

4सच्चई, नमरता अऊ नियाय के हित म

5तोर नुकीला तीरमन राजा के बईरीमन के हिरदय ला छेद डारंय;

6हे परमेसर, तोर सिंघासन ह सदाकाल तक बने रहिही;

7तेंह धरमीपन ले मया अऊ दुस्टता ले घिन करथस;

8तोर जम्मो ओनहामन लोहबान, मुसब्बर अऊ दालचीनी के सुगंध ले महकत हंय;

9राजामन के बेटीमन तोर सम्मानित माईलोगनमन के बीच हवंय;

10हे बेटी, सुन, अऊ बने करके ये बात ऊपर धियान दे:

11राजा ह तोर सुघरता ला देखके मोहित होवय;

12सूर देस के सहर ह एक ठन भेंट लेके आही,+ 45:12 या सूर के कपड़ा भेंट के रूप म होथे*

13राजकुमारी ह अपन कमरा म पूरा सोभायमान हे;

14कसीदा करे कपड़ा पहिराके ओला राजा करा लाने जाथे;

15आनंद अऊ खुसी के संग ओमन ला लाने जाथे,

16तोर ददामन के जगह ला तोर बेटामन लीहीं;

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