1परमेसर ह हमर सरन-स्थान अऊ बल अय,
2एकरसेति हमन नइं डरन, चाहे धरती ह पलट जावय
3चाहे समुंदर के पानी ह गरजय अऊ ओमा ले फेन निकलय
4एक नदी हवय, जेकर जल-धारामन परमेसर के सहर ला खुस कर देथें,
5परमेसर ह ओ नगर+ 46:5 या यरूसलेम* म हवय, ओ नगर ह नइं गिरय;
6जाति-जाति के मनखेमन के बीच खलबली मचे हवय, कतको राजमन गिर जावत हें;
7यहोवा सर्वसक्तिमान ह हमर संग हवय;
8आवव अऊ यहोवा के काम ला देखव
9ओह धरती के छोर तक
10ओह कहिथे, “सांत रहव, अऊ ये बात ला जान लव कि मेंह परमेसर अंव;