भजन-संहिता 49:1-19 CGOCV2024 - Bible AI

1हे जम्मो मनखेमन, तुमन ये बात ला सुनव;

2का ऊंच, का नीच,

3मोर मुहूं ले बुद्धि के बात निकलही;

4मेंह नीतिबचन कोति अपन कान लगाहूं;

5जब बिपत्ति के दिन आथे, त मेंह काबर डरंव,

6ओ मनखे, जेमन अपन धन ऊपर भरोसा रखथें

7कोनो भी मनखे कोनो आने मनखे के जिनगी के उद्धार नइं कर सकय

8जिनगी के छुड़ौती के दाम ह मंहगा होथे,

9कि ओह सदाकाल तक जीयत रहय

10काबरकि जम्मो झन देख सकत हें कि बुद्धिमानमन मरथें,

11ओमन सोचथें कि ओमन के कबर ह सदाकाल तक ओमन के घर बने रहिही,

12अपन धन-संपत्ति के बावजूद, मनखे ह हमेसा बने नइं रहय;

13येह ओमन के दुरभाग्य ए, जेमन अपन ऊपर भरोसा रखथें,

14ओमन भेड़मन सहीं अंय अऊ ओमन के मरना निस्चित अय;

15पर परमेसर ह मोला मिरतू-लोक ले छोंड़ाही;

16जब आने मन धनी होथें,

17काबरकि जब ओमन मरहीं, त अपन संग कुछू नइं ले जावंय,

18हालाकि जब ओमन जीयत रहिथें, त अपनआप ला आसीसित समझथें—

19ओमन अपन पुरखामन संग मिल जाहीं,

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