भजन-संहिता 53:1-5 CGOCV2024 - Bible AI

1मुरूख ह अपन मन म कहिथे,

2परमेसर ह स्वरग ले

3हर मनखे ह भटक गे हवय, जम्मो झन बिगड़ गे हवंय;

4का ये जम्मो दुस्ट काम करइयामन कुछू नइं जानंय?

5जिहां डरे के कोनो बात नइं रहय,

le>