भजन-संहिता 55:1-22 CGOCV2024 - Bible AI

1हे परमेसर, मोर पराथना ला सुन,

2मोर बात ला सुन अऊ मोला जबाब दे।

3काबरकि मोर बईरी ह मोर बिरूध कहत हे,

4मोर हिरदय ह भीतरे-भीतर पीरा म हवय;

5डर अऊ कंपकपी मोला घेर ले हवय;

6मेंह कहेंव, “कास, मोर एक पंड़की सहीं डेना होतिस!

7मेंह उड़के दूरिहा चले जातेंव

8मेंह आंधी अऊ तूफान ले दूरिहा

9हे परभू, दुस्टमन ला बिचलित कर दे, ओमन के बात म गड़बड़ी कर दे,

10रात अऊ दिन ओमन सहर के दीवार म चोरी-छुपे घुमथें;

11सहर म बिनास करइया ताकतमन काम करत हें;

12कहूं कोनो बईरी ह मोर बेजत्ती करतिस,

13पर येह तो तें अस, मोर सहीं एक मनखे,

14जेकर संग परमेसर के घर म

15अचानक मोर बईरीमन के मिरतू हो जावय;

16पर जहां तक मोर बात ए, मेंह परमेसर के नांव लेथंव,

17सांझ, बिहनियां अऊ मंझन के बेरा

18मोर बिरूध करे जावत लड़ई म

19परमेसर, जऊन ह आदिकाल ले बिराजमान हे,

20मोर संगवारी ह अपन संगीमन ऊपर हमला करथे;

21ओकर बातचीत ह मक्खन के सहीं चिक्कन हवय,

22अपन जिम्मेदारी यहोवा ऊपर डार दे

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