1हे परमेसर, तेंह हमन ला अस्वीकार कर दे हस, अऊ हमर ऊपर बरस पड़े हस:
2तेंह भुइयां ला कंपाय हस अऊ येला फोर दे हस;
3तेंह अपन मनखेमन ला निरासा के दिन देखाय हस;
4पर जऊन मन तोर भय मानथें, ओमन बर तेंह एक झंडा उठाय हस
5अपन जेवनी हांथ उठाके हमन ला बचा अऊ हमर मदद कर,
6परमेसर ह अपन पबितर-स्थान ले कहे हवय:
7गिलाद ह मोर ए, अऊ मनस्से ह घलो मोर ए;
8मोआब ह मोर हांथ-मुहूं धोए के बरतन ए,
9कोन ह मोला गढ़वाले सहर म लानही?
10हे परमेसर, का ये तें नो हस, तें जऊन ह कि हमन ला अस्वीकार करे हस
11बईरीमन के बिरूध हमर मदद कर,