भजन-संहिता 68:1-34 CGOCV2024 - Bible AI

1परमेसर ह उठय, ओकर बईरीमन तितिर-बितिर हो जावंय;

2तें ओमन ला धुआं के सहीं उड़ा दे—

3पर धरमी जन परमेसर के आघू म

4परमेसर के गीत गावव, ओकर नांव के परसंसा के गीत गावव,

5परमेसर ह अपन पबितर निवास म हवय,

6परमेसर ह अकेला मनखे ला परिवार म बसाथे,

7हे परमेसर, जब तेंह अपन मनखेमन के आघू ले निकलय,

8त धरती ह कांपिस, अकास ह बारिस भेजिस,

9हे परमेसर, तेंह बहुंत बारिस दे हस;

10तोर मनखेमन येमा बस गे हवंय,

11परभू ह बचन के घोसना करथे,

12“राजा अऊ सेनामन जल्दबाजी म भागथें;

13अऊ त अऊ जब तुमन भेड़साला म सुतथव,

14जब सर्वसक्तिमान परमेसर ह राजामन ला देस म तितिर-बितिर करिस,

15बासान पहाड़, सानदार पहाड़,

16हे उबड़-खाबड़ पहाड़, तेंह ओ पहाड़ ला

17परमेसर के रथमन बीस हजार

18जब तेंह ऊंचहा जगह म गय,

19परभू, परमेसर हमर उद्धारकर्ता के परसंसा होवय,

20हमर परमेसर ह ओ परमेसर अय, जऊन ह हमन ला बचाथे;

21खचित परमेसर ह अपन बईरीमन के मुड़ ला कुचरही,

22परभू ह कहिथे, “मेंह ओमन ला बासान ले लानहूं;

23कि तें अपन बईरीमन के खून म चलके जा सकस,

24हे परमेसर, तोर जुलूस ला देखे गे हवय,

25आघू-आघू गवइयामन अऊ ओमन के पाछू बाजावाले हवंय;

26बड़े सभा म परमेसर के परसंसा करव;

27बिनयामीन के छोटे गोत्र ह ओमन के अगुवई करत हे,

28हे परमेसर, अपन सामर्थ ला देखा;

29यरूसलेम म तोर मंदिर के कारन

30नरकट म रहत जंगली पसुमन ला,

31दूतमन मिसर देस ले आहीं;

32हे धरती के राजमन, परमेसर के गीत गावव,

33ओकर परसंसा करव, जऊन ह सनातन स्वरग, सबले ऊंच स्वरग म सवारी करथे,

34परमेसर के सामर्थ के घोसना करव,

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