भजन-संहिता 78:1-71 CGOCV2024 - Bible AI

1हे मोर मनखेमन, मोर सिकछा ऊपर धियान देवव;

2मेंह अपन बात एक पटंतर म करहूं;

3ओ बात जेला हमन सुने हन अऊ जान ले हन,

4यहोवा के परसंसा के काम,

5ओह याकूब बर बिधिमन ला ठहिराईस

6ताकि अवइया पीढ़ी के मनखेमन ओला जानंय,

7तब ओमन परमेसर ऊपर अपन भरोसा रखहीं

8ओमन अपन पुरखामन सहीं नइं होहीं—

9एपरैम के मनखेमन हालाकि धनुस धरे रिहिन,

10ओमन परमेसर के करार ला नइं मानिन

11ओमन भुला गीन कि परमेसर ह ओमन बर का करे रिहिस,

12ओह ओमन के पुरखामन के आघू म मिसर देस के

13ओह समुंदर ला दू भाग करके ओमन ला उहां ले निकाले रिहिस;

14ओह दिन के समय बादर के दुवारा

15ओह उजाड़ जगह म पथरामन ला फोरके

16ओह उबड़-खाबड़ चट्टान म ले पानी के धारा निकालिस

17पर ओमन निरजन जगह म सर्वोच्च परमेसर के बिरूध बिदरोह करत

18ओमन लालायित होके जेवन मांगे के दुवारा

19ओमन परमेसर के बिरूध गोठियाईन;

20सही म, ओह चट्टान ला मारिस,

21जब यहोवा ह ओमन के बात ला सुनिस, त ओह बहुंत नराज होईस;

22काबरकि ओमन परमेसर ऊपर बिसवास नइं करिन,

23तभो ले ओह ऊपर अकास ला हुकूम दीस

24ओह मनखेमन के खाय बर मन्ना के बारिस करिस,

25मनखेमन स्वरगदूतमन के रोटी खावत रिहिन;

26ओह अकास ले पूरबी हवा चलाईस

27ओह ओमन बर धुर्रा के सहीं मांस के बारिस करिस,

28ओह ओ चिरईमन ला ओमन के तम्बू के चारों कोति

29ओमन गला के आवत तक खाईन—

30पर येकर पहिले कि ओमन अपन लालसा करे चीज ले फिरतिन,

31कि परमेसर के कोरोध ह ओमन के बिरूध भड़किस;

32अतेक होय के बाद घलो ओमन पाप करते रिहिन;

33एकरसेति ओह ओमन के जिनगी के दिनमन ला बेकार म

34जब भी परमेसर ह ओमन के हतिया करय, ओमन ओकर खोज करंय;

35ओमन सुरता करंय कि परमेसर ह ओमन के चट्टान ए,

36पर तब ओमन अपन मुहूं ले ओकर चापलूसी करंय,

37ओमन के मन ह ओकर बर ईमानदार नइं रिहिस,

38तभो ले ओह ओमन ऊपर दया करिस;

39ओह सुरता रखिस कि ओमन सिरिप हाड़-मांस के मनखे अंय,

40निरजन जगह म ओमन ओकर बिरूध कतेक बार ले बिदरोह करिन

41बार-बार ओमन परमेसर ला परखिन;

42ओमन ओकर सामर्थ ला सुरता नइं करिन—

43ओ दिन जब ओह मिसर देस म अपन चिनहां,

44ओह मिसरीमन के नदी के पानी ला खून म बदल दीस;

45ओह ओमन ऊपर मधुमक्खीमन के झुंड पठोईस, जेमन ओमन ला खा गीन,

46ओह ओमन के फसल ला कीरामन ला,

47ओह ओमन के अंगूर के नारमन ला करा गिराके

48ओह ओमन के पालतू पसुमन ला करा गिराके,

49ओह ओमन के बिरूध अपन भारी गुस्सा,

50ओह अपन कोरोध बर एक रसता तियार करिस;

51ओह मिसर देस के जम्मो पहिलांतमन ला मार डारिस,

52पर ओह अपन मनखेमन ला पसुमन के झुंड सहीं बाहिर निकालिस;

53ओह ओमन ला सुरकछित निकालिस, जेकर ले ओमन निडर रिहिन;

54अऊ ये किसम ले ओह ओमन ला अपन पबितर देस के सीमना,

55ओह ओमन के आघू ले जाति-जाति के मनखेमन ला भगा दीस

56पर ओमन परमेसर के परिछा लीन

57अपन पुरखामन के सहीं ओमन बिसवासघाती अऊ बेईमान निकलिन,

58ओमन देवतामन बर ऊंच जगहमन ला बनाके ओला गुस्सा दिलाईन;

59जब परमेसर ह ओमन के सुनिस, त ओह बहुंत गुस्सा होईस;

60ओह सीलो सहर के ओ पबितर-तम्बू ला तियाग दीस,

61ओह अपन ताकत के सन्दूक ला बंधुवई म,

62ओह अपन मनखेमन ला तलवार ले मरवा दीस;

63आगी ह ओमन के जवानमन ला भसम कर दीस,

64ओमन के पुरोहितमन तलवार ले मार डारे गीन,

65तब परभू ह मानो नींद ले जागिस,

66ओह अपन बईरीमन ला मार भगाईस;

67तब ओह यूसुफ के तम्बू ला तियाग दीस,

68पर ओह यहूदा के गोत्र,

69ओह अपन पबितर-स्थान ला ऊंचहा जगह सहीं बनाईस,

70ओह अपन सेवक दाऊद ला चुनिस

71भेड़ चराय के काम ले दाऊद ला हटाके ओह ले आईस

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