1परमेसर के सभा म परमेसर ही सभापति होथे;
2“तुमन कब तक अनियायीमन के बचाव करते रहिहू
3दुरबल अऊ अनाथमन के बचाव करव;
4दुरबल अऊ जरूरतमंद के बचाव करव;
5“ ‘देवतामन’ कुछू नइं जानंय, ओमन कुछू नइं समझंय।
6“मेंह कहेंव, ‘तुमन “ईस्वर” अव;
7पर तुमन सिरिप मरनहार मनखे सहीं मरहू;