1जऊन ह सर्वोच्च परमेसर के सरन म रहिही, ओह सर्वसक्तिमान के छइहां म अराम करही।
2मेंह यहोवा के बारे म कहिहूं, “ओह मोर सरन-स्थान अऊ मोर गढ़ अय। मोर परमेसर, जेकर ऊपर मेंह भरोसा करथंव।”
3खचित ओह तोला चिड़ीमार के फंदा अऊ घातक महामारी ले बचाही।
4ओह अपन पांखी के खाल्हे म तोला ढांप लीही, अऊ ओकर डेनामन के खाल्हे म तोला सरन मिलही; ओकर बिसवासयोग्यता ह तोर ढाल अऊ झिलम होही।
5रथिया के आतंक ले तोला डर नइं होही, न ही ओ तीर ले डरबे, जेला दिनमान छोंड़े जाथे,
6न ही ओ महामारी ले, जऊन ह छिपके पीछा करथे, न ही ओ महारोग ले, जऊन ह दिन-दुपहरी म नास करथे।
7तोर बाजू म एक हजार, अऊ जेवनी हांथ कोति दस हजार गिर सकथें, पर येह तोर लकठा म नइं आही।
8तेंह अपन आंखी ले सिरिप देखत रहिबे अऊ दुस्टमन के दंड ला देखबे।
9कहूं तेंह कहिथस, “यहोवा ह मोर सरन-स्थान ए,” अऊ तेंह सर्वोच्च परमेसर ला अपन निवास बनाथस,
10त तोला कोनो हानि नइं होही, अऊ तोर डेरा के लकठा म कोनो बिपत्ति नइं आही।
11काबरकि ओह तोर बारे म अपन स्वरगदूतमन ला हुकूम दीही कि ओमन हर काम म तोर रकछा करंय;
12ओमन तोला अपन हांथ म उठा लीहीं, ताकि तोर गोड़ म पथरा ले चोट झन लगय।
13तेंह सिंह अऊ नाग सांप ला गोड़ ले कुचरबे; तेंह बड़े सिंह अऊ बड़े सांप ला कुचरबे।
14यहोवा ह कहिथे, “काबरकि ओह+ 91:14 संभवतः राजा मोर ले मया करथे, मेंह ओला छोंड़ाहूं; मेंह ओला बचाहूं, काबरकि ओह मोर नांव ला मानथे।
15ओह मोला पुकारही, अऊ मेंह ओला जबाब दूहूं; संकट के बेरा म मेंह ओकर संग रहिहूं, मेंह ओला छोंड़ाहूं अऊ ओला आदर दूहूं।
16बहुंत उमर देके ओकर मन ला मेंह संतोस करहूं अऊ ओला अपन उद्धार के दरसन कराहूं।”