1यहोवा ह बदला लेवइया परमेसर ए।
2हे धरती के नियाय करइया, उठ;
3हे यहोवा, दुस्टमन कब तक,
4ओमन हमेसा घमंड के बात करत रहिथें;
5हे यहोवा, ओमन तोर मनखेमन ला कुचरथें;
6ओमन बिधवा अऊ परदेसी ला मार डारथें;
7ओमन कहिथें, “यहोवा ह नइं देखय;
8हे मनखेमन के बीच निरबुद्धि मनखेमन, तुमन धियान देवव;
9जऊन ह कान ला बनाईस, का ओह खुद नइं सुनय?
10जऊन ह जाति-जाति के मनखेमन के ताड़ना करथे, का ओह दंड नइं देवय?
11यहोवा ह मनखेमन के जम्मो योजना ला जानथे;
12हे यहोवा, धइन अय ओ, जेकर तेंह ताड़ना करथस,
13समस्या के समय म तेंह ओमन ला तब तक मदद करत रहिथस,
14काबरकि यहोवा ह अपन मनखेमन ला नइं तियागही;
15नियाय फेर धरमीपन के आधार म करे जाही,
16दुस्टमन के बिरोध म, मोर बर कोन ठाढ़ होही?
17यदि यहोवा ह मोर मदद नइं करे होतिस,
18जब मेंह कहेंव, “मोर गोड़ ह फिसलत हे,”
19जब भीतरे-भीतर मेंह बहुंत बियाकुल रहेंव,
20का कोनो दुस्ट सासक ह तोर संग संधि कर सकथे—
21दुस्टमन धरमी जन के बिरूध एक संग जूरथें
22पर यहोवा ह मोर गढ़ बन गे हवय,