मत्ती 21:1-45 CGOCV2024 - Bible AI

1जब ओमन यरूसलेम के लकठा म हबरिन अऊ जैतून पहाड़ के बैतफगे गांव करा आईन, त यीसू ह दू झन चेलामन ला ये कहिके पठोईस,

2“आघू के गांव म जावव। जइसने ही तुमन उहां हबरहू, तुमन ला एक ठन गदही बंधाय मिलही अऊ ओकर संग म ओकर बछेड़ा घलो होही। ओमन ला ढीलके मोर करा ले आवव।

3यदि कोनो तुमन ला कुछू कहिथे, त ओला कहव कि परभू ला येमन के जरूरत हवय। तब ओह तुरते ओमन ला पठो दीही।”

4येह एकरसेति होईस ताकि अगमजानी के दुवारा कहे गय ये बात ह पूरा होवय:

5“बेटी सियोन ले कहव,

6तब दूनों चेलामन गीन, अऊ जइसने यीसू ह ओमन ला करे बर कहे रिहिस, वइसनेच करिन।

7ओमन गदही अऊ ओकर बछेड़ा ला लानिन अऊ ओमन के ऊपर अपन ओनहामन ला दसा दीन; तब यीसू ह ओमन ऊपर बईठ गीस।

8भीड़ के बहुंत मनखेमन अपन ओनहा ला डहार म दसा दीन अऊ दूसर मनखेमन रूख के डारामन ला काटके डहार म दसा दीन।

9भीड़ के मनखेमन यीसू के आघू-आघू अऊ पाछू-पाछू घलो चलत रहंय अऊ ओमन चिचिया-चिचियाके कहत रहंय,

10जब यीसू ह यरूसलेम म आईस, त जम्मो सहर म हलचल मच गीस अऊ मनखेमन पुछन लगिन, “येह कोन ए?”

11भीड़ के मनखेमन कहिन, “येह अगमजानी यीसू ए, अऊ गलील प्रदेस के नासरत के रहइया ए।”

12यीसू ह मंदिर म गीस, अऊ ओ जम्मो मनखेमन ला निकाल दीस, जऊन मन मंदिर म लेन-देन करत रिहिन। ओह रूपिया-पईसा के अदला-बदली करइयामन के मेज अऊ पंड़की बेचइयामन के बेंचमन ला खपल दीस।

13अऊ ओह ओमन ला कहिस, “परमेसर के बचन म ये लिखे हवय कि मोर घर ह पराथना के घर कहे जाही, पर तुमन येला डाकूमन के अड्डा बनावत हवव।”

14अंधरा अऊ खोरवामन यीसू करा मंदिर म आईन अऊ ओह ओमन ला चंगा करिस।

15पर जब मुखिया पुरोहित अऊ मूसा के कानून के गुरूमन ओकर अद्भूत काम ला देखिन अऊ लइकामन ला मंदिर के इलाका म चिचियाके ये कहत सुनिन, “दाऊद के संतान के होसाना,” त ओमन नराज होईन।

16ओमन यीसू ला कहिन, “का तेंह सुनत हवस कि ये लइकामन का कहत हवंय?”

17तब यीसू ह ओमन ला छोंड़के सहर के बाहिर बैतनियाह गांव म गीस अऊ उहां रात बिताईस।

18बड़े बिहनियां, जब यीसू ह सहर ला वापिस जावत रिहिस, त ओला भूख लगिस।

19सड़क के तीर म एक ठन अंजीर के रूख ला देखके, ओह उहां गीस, पर ओला पान के छोंड़ ओमा अऊ कुछू नइं मिलिस। तब यीसू ह ओ रूख ला कहिस, “अब ले तोर म फेर कभू फर झन लगय।” अऊ तुरते ओ अंजीर के रूख ह सूख गीस।

20जब चेलामन येला देखिन, त ओमन अचम्भो करिन अऊ कहिन, “अंजीर के रूख ह तुरते कइसने सूख गीस?”

21यीसू ह ओमन ला जबाब दीस, “मेंह तुमन ला सच कहत हंव, यदि तुमन बिसवास करव अऊ संका झन करव, त तुमन न सिरिप अइसने करहू, जइसने मेंह ये अंजीर के रूख के संग करे हवंव, पर यदि तुमन ये पहाड़ ले कहिहू, ‘जा अऊ समुंदर म गिर जा।’ अऊ येह हो जाही।

22यदि तुमन बिसवास करथव, त जऊन कुछू तुमन पराथना म मांगव, ओह तुमन ला मिल जाही।”

23यीसू ह मंदिर म गीस, अऊ जब ओह उपदेस देवत रिहिस, त मुखिया पुरोहितमन अऊ मनखेमन के अगुवामन ओकर करा आईन अऊ पुछिन, “तेंह कोन अधिकार ले ये चीजमन ला करत हवस? अऊ कोन ह तोला ये अधिकार दे हवय?”

24यीसू ह ओमन ला जबाब दीस, “मेंह घलो तुमन ले एक सवाल पुछत हंव, यदि तुमन मोला जबाब दूहू, त मेंह घलो तुमन ला बताहूं कि कोन अधिकार ले मेंह ये काममन ला करत हवंव।

25यूहन्ना के बतिसमा देवई ह कहां ले रिहिस? स्वरग ले रिहिस या मनखे कोति ले?”

26पर यदि हमन कहन, ‘मनखे कोति ले,’ त हमन ला मनखेमन के डर हवय, काबरकि ओ जम्मो झन बिसवास करथें कि यूहन्ना ह एक अगमजानी रिहिस।”

27एकरसेति ओमन यीसू ला जबाब दीन, “हमन नइं जानन।”

28“तुमन का सोचथव? एक मनखे रिहिस, जेकर दू झन बेटा रिहिन। ओह पहिला बेटा करा गीस अऊ कहिस, ‘बेटा, जा अऊ आज अंगूर के बारी म काम कर।’

29“ओह जबाब दीस, ‘मेंह नइं जावंव।’ पर बाद म ओह पछताईस अऊ गीस।

30“तब ददा ह दूसर बेटा करा गीस अऊ ओहीच बात कहिस। ओह जबाब दीस, ‘हव ददा, मेंह जावत हंव।’ पर ओह नइं गीस।

31“ये दूनों बेटा म ले कोन ह अपन ददा के ईछा ला पूरा करिस?”

32काबरकि यूहन्ना ह तुमन ला धरमीपन के रसता देखाय बर आईस, अऊ तुमन ओकर ऊपर बिसवास नइं करेव, पर लगान लेवइया अऊ बेस्यामन ओकर ऊपर बिसवास करिन। येला देखे के बाद घलो, तुमन पछताप नइं करेव अऊ न ही ओकर ऊपर बिसवास करेव।

33“एक अऊ पटंतर सुनव: एक जमींदार रिहिस, जऊन ह एक अंगूर के बारी लगाईस। ओह बारी के चारों खूंट बाड़ा बांधिस। ओह ओमा एक ठन रस के कुन्ड खनवाईस अऊ एक ठन मचान बनाईस। तब ओह ओ अंगूर के बारी ला कुछू किसानमन ला रेगहा म देके आने देस चल दीस।

34जब फर के समय ह आईस, त ओह अपन सेवकमन ला किसानमन करा पठोईस ताकि ओमन ओकर बांटा के फर ला लानंय।

35“पर किसानमन ओकर सेवकमन ला पकड़ लीन, अऊ ओमन कोनो ला मारिन-पीटिन, कोनो ला जान सहित मार डारिन अऊ काकरो ऊपर पथरा फेंकिन।

36तब जमींदार ह आने सेवकमन ला पठोईस, जऊन मन संखिया म पहिली ले जादा रिहिन; पर किसानमन ओमन के संग घलो वइसनेच करिन।

37आखिरी म, ओह ये सोचके अपन बेटा ला पठोईस कि ओमन मोर बेटा के आदर करहीं।

38“पर जब किसानमन जमींदार के बेटा ला देखिन, त एक-दूसर ला कहिन, ‘येह तो अंगूर के बारी के वारिस ए। आवव, हमन येला मार डालन अऊ एकर संपत्ति ला ले लेवन।’

39ओमन ओला पकड़िन अऊ अंगूर के बारी के बाहिर फटिक दीन अऊ ओला मार डारिन।

40“एकरसेति जब अंगूर के बारी के मालिक ह आही, त ओह ओ किसानमन के संग का करही?”

41ओमन यीसू ला कहिन, “ओह ओ दुस्टमन ला पूरा नास कर दीही, अऊ अंगूर के बारी के रेगहा आने किसानमन ला दे दीही, जऊन मन समय म ओकर बांटा के फसल ओला दीहीं।”

42यीसू ह ओमन ला कहिस, “का तुमन पबितर बचन म कभू नइं पढ़ेव:

43“एकरसेति मेंह तुमन ला कहत हंव कि परमेसर के राज ह तुम्हर ले लेय लिये जाही, अऊ ओ मनखेमन ला दिये जाही, जऊन मन परमेसर बर फर पईदा करहीं।

44जऊन ह ये पथरा ऊपर गिरही, ओह कुटा-कुटा हो जाही, पर जेकर ऊपर ये पथरा ह गिरही, ओह पीसा जाही।”

45यीसू के पटंतर ला सुनके मुखिया पुरोहित अऊ फरीसीमन समझ गीन कि ओह ओमन के बारे म गोठियावत हवय।

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