मरकुस 4:1-40 CGOCV2024 - Bible AI

1यीसू ह फेर झील के तीर म उपदेस करन लगिस अऊ उहां अइसने भीड़ जूर गीस कि ओह झील म एक ठन डोंगा ऊपर चघके बईठ गीस अऊ जम्मो मनखेमन झील के तीर म रहंय।

2ओह ओमन ला पटंतर म बहुंत अकन बात सिखोवन लगिस अऊ अपन उपदेस म कहिस:

3“सुनव, एक किसान ह बीज बोय बर निकलिस।

4जब ओह बोवत रिहिस, त कुछू बीजामन रसता के तीर म गिरिन अऊ चिरईमन आके ओला खा लीन।

5कुछू बीजामन पथर्री भुइयां म गिरिन, जिहां ओमन ला जादा माटी नइं मिलिस। ओ बीजामन जल्दी जाम गीन काबरकि उहां माटी ह गहिरा नइं रिहिस।

6पर जब सूरज निकलिस, त ओमन मुरझा गीन अऊ जरी नइं धरे रहय के कारन ओमन सूख गीन।

7कुछू बीजामन कंटिली झाड़ीमन के बीच म गिरिन अऊ ओ झाड़ीमन बढ़के ओमन ला दबा दीन, जेकर कारन ओमन म फर नइं धरिन।

8पर कुछू बीजामन बने भुइयां ऊपर गिरिन; ओमन जामिन अऊ बाढ़के जादा फर लानिन; कोनो तीस गुना, कोनो साठ गुना अऊ कोनो सौ गुना।”

9तब यीसू ह कहिस, “जेकर सुने के कान हवय, ओह सुन ले।”

10जब यीसू ह अकेला रिहिस, तब ओकर बारह चेला अऊ ओकर संग के मन ओकर ले पटंतर के बारे म पुछिन।

11ओह ओमन ला कहिस, “परमेसर के राज के भेद के गियान तुमन ला देय गे हवय, पर बाहिर वाले मन ला सब गोठ पटंतर म बोले जाथे।

12ताकि,

13तब यीसू ह ओमन ला कहिस, “का तुमन ये पटंतर ला नइं समझेव, तब आने पटंतरमन ला कइसने समझहू?

14बोवइया ह परमेसर के बचन ला बोथे।

15कुछू मनखेमन डहार के तीर म परे बीजा सहीं अंय; जब बचन ह बोय जाथे, तब तुरते सैतान ह आके ओमन म बोय गे बचन ला ले जाथे।

16आने मन ओ बीजा के सहीं अंय, जऊन ला पथर्री भुइयां ऊपर बोय जाथे; ओमन बचन ला सुनके तुरते ओला आनंद सहित गरहन करथें।

17पर अपन म जरी नइं धरे रहय के कारन, ओमन के बिसवास ह कुछू समय तक ही रहिथे, जब बचन के सेति समस्या अऊ सतावा आथे, त ओमन तुरते बचन के मुताबिक चले बर बंद कर देथें।

18जऊन ला कंटिली झाड़ीमन म बोय गीस, ओमन ये अंय—ओमन बचन ला सुनथें,

19पर ये जिनगी के चिंता, धन के लोभ अऊ आने चीजमन के ईछा ओमन म हमाके बचन ला दबा देथें अऊ ओमन फर नइं लानंय।

20पर जऊन ला बने भुइयां म बोय जाथे, ओमन ये अंय—ओमन बचन ला सुनके गरहन करथें अऊ फर लानथें—कोनो तीस गुना, कोनो साठ गुना अऊ कोनो सौ गुना।”

21यीसू ह ओमन ला कहिस, “का दीया ला ये खातिर लानथें कि बड़े कटोरा या खटिया के खाल्हे म मढ़ाय जावय? का ये खातिर नइं कि दीया ला दीवट ऊपर मढ़ाय जावय?

22काबरकि जऊन कुछू छिपे हवय, ओला उघारे जाही, अऊ जऊन कुछू घलो ढंके हवय, ओकर खुलासा करे जाही।

23कहूं काकरो कान हवय, त ओह सुन ले।”

24“जऊन कुछू तुमन सुनथव, ओकर ऊपर बने करके बिचार करव। जऊन नाप ले तुमन नापथव, ओही नाप ले तुम्हर बर घलो नापे जाही, बल्कि अऊ जादा।

25जेकर करा हवय, ओला अऊ दिये जाही, अऊ जेकर करा नइं ए, ओकर ले, जऊन कुछू बांचे हवय, ओला घलो ले लिये जाही।”

26यीसू ह ये घलो कहिस, “परमेसर के राज ह अइसने अय—एक मनखे ह बीजा ला भुइयां म बोथे।

27रात अऊ दिन, चाहे ओह सुतय या जागय, बीजा ह अपनआप जामथे अऊ बाढ़थे अऊ ओह नइं जानय कि येह कइसने होईस?

28माटी ह आपे-आप फसल उपजाथे—पहिली पीका निकलथे, तब बाली, अऊ तब बालीमन म पूरा दाना तियार होथे।

29जतकी जल्दी दाना पाकथे, मनखे ह हंसिया लेके लुए के सुरू कर देथे, काबरकि येह लुवई के समय होथे।”

30फेर यीसू ह कहिस, “हमन परमेसर के राज ला काकर सहीं ठहिरावन या कोन पटंतर म ओकर बखान करन?

31ओह सरसों के बीजा सहीं अय, जब येह बोए जाथे, त येह भुइयां म जम्मो बीजामन ले छोटे होथे।

32तभो ले लगाय के बाद येह बाढ़के, बारी म जम्मो साग-भाजी ले बड़े हो जाथे, अऊ ओकर अइसने बड़े-बड़े डारामन निकलथें कि अकास के चिरईमन ओकर छइहां म बसेरा कर सकथें।”

33बचन ला समझाय खातिर, यीसू ह अइसने कतको पटंतर ओमन ला कहिस।

34बिगर पटंतर के ओह ओमन ला कुछू नइं कहत रिहिस। पर जब ओह अपन चेलामन संग अकेला रहय, त ओमन ला जम्मो गोठमन के मतलब ला साफ-साफ समझावय।

35ओहीच दिन संझा के बखत, ओह अपन चेलामन ला कहिस, “आवव, हमन झील के ओ पार चलन।”

36भीड़ ला पाछू छोंड़के, ओमन जइसने यीसू रिहिस, वइसने ओला अपन संग डोंगा म ले गीन। उहां ओकर संग अऊ डोंगामन घलो रहंय।

37तब एक बड़े भारी आंधी आईस अऊ पानी के बड़े-बड़े लहरा उठिस, जेकर कारन पानी ह डोंगा म हमाय लगिस अऊ डोंगा ह बुड़े बर होवत रहय।

38यीसू ह डोंगा के पाछू म गद्दी ऊपर सोवत रहय। तब चेलामन ओला उठाके कहिन, “हे गुरू, का तोला कोनो फिकर नइं ए कि हमन पानी म बुड़त हवन?”

39ओह उठके आंधी ला दबकारिस अऊ पानी के लहरामन ला कहिस, “सांत हो जावव, थम जावव।” तब आंधी ह थम गीस अऊ एकदम सांत हो गीस।

40ओह अपन चेलामन ला कहिस, “तुमन काबर डरावत हवव? का तुमन ला अब घलो मोर ऊपर बिसवास नइं ए?”

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