1धिक्कार अय ओमन ला, जऊन मन दुस्ट काम करे के योजना बनाथें,
2ओमन आने के खेत के लोभ करके ओला हड़प लेथें,
3एकरसेति, यहोवा ह कहिथे:
4ओ दिन मनखेमन तुम्हर हंसी उड़ाहीं;
5एकरसेति यहोवा के सभा म भुइयां ला चिट्ठी दुवारा बांटे बर
6ओमन के अगमजानीमन कहिथें, “अगमबानी झन करव;
7हे याकूब के संतानमन, का अइसे कहे जावय,
8कुछू समय पहिले ही मोर मनखेमन
9तुमन मोर मनखेमन के माईलोगनमन ला
10उठव, इहां ले चले जावव!
11कहूं कोनो लबरा अऊ धोखा देवइया मनखे आथे अऊ ये कहिथे,
12“हे याकूब के संतानमन, खचित मेंह तुमन जम्मो झन ला इकट्ठा करहूं;