1सुनव कि यहोवा ह का कहत हे:
2“हे पहाड़मन, यहोवा के दुवारा लगाय आरोप ला सुनव;
3“हे मोर मनखेमन, मेंह तुम्हर संग का अनियाय करे हवंव?
4मेंह तुमन ला मिसर देस ले बाहिर निकालेंव
5हे मोर मनखेमन, सुरता करव
6में यहोवा के आघू म का लेके आवंव
7का यहोवा ह हजारों मेढ़ा,
8हे मरनहार मनखे, ओह तोला देखाय हवय कि का ह बने अय।
9सुनव! यहोवा ह सहर+ 6:9 या यरूसलेम सहर* ला बलावत हे—
10हे दुस्ट घर, का में अब घलो तोर दुस्टता ले कमाय धन,
11का में कोनो ला बेईमानी के नाप,
12तोर धनी मनखेमन हिंसा करथें;
13एकरसेति, मेंह तुम्हर पाप के कारन
14तुमन जेवन तो करहू पर मन ह नइं भरही;
15तुमन अनाज के बोवई तो करहू, पर फसल नइं काटहू;