1यहोवा ह घोसना करत हे, “ओ समय म, मेंह जम्मो इसरायली परिवारमन के परमेसर होहूं, अऊ ओमन मोर मनखे होहीं।”
2यहोवा ह ये कहत हे:
3यहोवा ह बहुंत पहिले हमर करा परगट होके कहिस:
4मेंह तुमन ला फेर बनाहूं,
5तेंह सामरिया के पहाड़ीमन म
6एक अइसने दिन आही, जब रखवारमन
7यहोवा ह ये कहत हे:
8देखव, मेंह ओमन ला उत्तर दिग के देस ले लेय आहूं
9ओमन रोवत आहीं;
10“हे जाति-जाति के मनखेमन, यहोवा के बचन ला सुनव;
11काबरकि यहोवा ह याकूब ला छुड़ा लीही
12ओमन आहीं अऊ सियोन के ऊंचहा जगहमन म आनंद के मारे चिचियाहीं;
13तब जवान माईलोगनमन नाचहीं अऊ खुसी मनाहीं,
14मेंह पुरोहितमन ला बहुंतायत से देके ओमन ला संतोस कर दूहूं,
15यहोवा ह ये कहत हे:
16यहोवा ह ये कहत हे:
17एकरसेति तोर संतानमन बर आसा हवय,”
18“मेंह सही म एपरैम ला ये बिलाप करत सुने हवंव:
19भटक जाय के बाद,
20का एपरैम ह मोर मयारू बेटा नो हय,
21“हे कुंवारी इसरायल, सड़क के चिनहांमन ला ठीक कर;
22हे बेईमान बेटी इसरायल,
23सर्वसक्तिमान यहोवा, इसरायल के परमेसर ह ये कहत हे: “जब मेंह ओमन ला बंधुवई ले वापिस लानहूं, तब यहूदा देस अऊ येकर नगरमन के मनखेमन एक बार फेर ये बात कहिहीं: ‘हे सम्पन्न सहर, हे पबितर पहाड़, यहोवा ह तोला आसीस देवय।’
24यहूदा अऊ येकर जम्मो नगरमन म मनखेमन एक संग रहिहीं—किसानमन अऊ ओ मनखे, जऊन मन अपन पसु के झुंड के संग एक जगह ले आने जगह जावत रहिथें।
25मेंह थके मनखेमन ला ताजा अऊ दुरबल मनखेमन ला संतुस्ट करहूं।”
26अतका म मेंह जाग गेंव अऊ चारों कोति देखेंव। मोर नींद ह मोला बने लगिस।
27यहोवा ह घोसना करत हे, “ओ दिनमन आवत हें, जब मेंह इसरायल अऊ यहूदा के राजमन ला मनखे अऊ पसु दूनों के संतान सहित बढ़ाहूं।
28जइसने कि मेंह ओमन ला उखाने म अऊ गिराय म, अऊ फटिकके नास करे म अऊ बिपत्ति लाने म नजर रखेंव, वइसने ही मेंह ओमन ला बनाय म अऊ बढ़ाय म नजर रखहूं,” यहोवा ह घोसना करत हे।
29“ओ दिनमन म मनखेमन ये नइं कहिहीं,
30येकर उल्टा, हर एक मनखे ह ओकर खुद के पाप के कारन मरही; जऊन ह खट्टा अंगूर खाही—ओकर खुद के दांत ह खट्टा होही।
31“ओ दिनमन आवत हें,” यहोवा ह घोसना करत हे,
32येह ओ करार सहीं नइं होही,
33“ओ समय के बाद, मेंह इसरायल के मनखेमन संग
34ओमन अपन परोसी ला फेर ये कभू नइं सिखोहीं,
35यहोवा ह ये कहत हे,
36“यदि ये नियममन मोर आघू ले हट जावंय,”
37यहोवा ह ये कहत हे:
38“ओ दिनमन आवत हें,” यहोवा ह घोसना करत हे, “जब ये सहर ह हनानेल के ऊंच महल ले लेके कोना के दीवार तक मोर बर फेर बनाय जाही।
39नापे के लकीर ह उहां ले आघू बढ़के सीधा गारेब के पहाड़ी तक जाही अऊ तब मुड़के गोआ तक आही।