1“हे इसरायल, यदि तें लहुंटके आबे,
2अऊ यदि सच्चई, नियाय अऊ धरमीपन म
3यहोवा ह यहूदा अऊ यरूसलेम के मनखेमन ला ये कहत हे:
4हे यहूदा के मनखे अऊ यरूसलेम के निवासीमन,
5“यहूदा अऊ यरूसलेम म घोसना करके कहव:
6सियोन जाय बर झंडा ला ऊंचा करव!
7एक सिंह ह अपन मांद ले निकले हवय;
8एकरसेति बोरा के ओनहा ला पहिर लव,
9यहोवा ह ये घोसना करत हे,
10तब मेंह कहेंव, “हाय, हे परमपरधान यहोवा! तेंह ये मनखेमन अऊ यरूसलेम ला ये कहिके कइसे पूरा धोखा देय हवस, ‘तुमन ला सांति मिलही,’ जबकि तलवार ह हमर घेंच म रखे हवय!”
11ओ बखत ये मनखेमन ला अऊ यरूसलेम ला बताय जाही, “सुन्ना जगह के बंजर टीलामन ले मोर मनखेमन कोति एक झुलसा देवइया हवा चलही, पर येह पछरे बर या साफ करे बर नइं होही;
12ये हवा ह जादा सक्तिसाली होही, जेह मोर करा ले आथे। अब मेंह ओमन के बिरूध दंड के घोसना करत हंव।”
13देखव! ओह बादरमन सहीं आघू बढ़थे,
14हे यरूसलेम, अपन हिरदय ले बुरई ला धो अऊ तोर उद्धार होवय।
15दान सहर ले एक अवाज सुनई देवत हे,
16“जाति-जाति के मनखेमन ला ये बतावव,
17ओमन खेत के रखवारमन सहीं यहूदा ला घेरत हवंय,
18“तोर बरताव अऊ तोर काममन के कारन
19आह, मोर पीरा, मोर पीरा!
20बिपत्ति ऊपर बिपत्ति आवत हे;
21कब तक ले, मोला लड़ई के झंडा ला देखना पड़ही
22“मोर मनखेमन मुरूख अंय;
23मेंह धरती ला देखेंव,
24मेंह पहाड़मन ला देखेंव,
25मेंह देखेंव, अऊ उहां कोनो मनखे नइं रिहिन;
26मेंह देखेंव, यहोवा के आघू, ओकर भयंकर कोरोध के कारन,
27यहोवा ह ये कहत हे:
28एकरसेति धरती ह बिलाप करही
29घुड़सवार अऊ धनुसधारीमन के अवाज ला सुनके
30हे नास होय जन, तेंह का करत हस?