1आह, बने होतिस कि मोर मुड़ ह पानी के सोता
2आह, बने होतिस कि डहार रेंगइयामन बर
3“ओमन अपन जीभ ला धनुस म चघाय तीर सहीं
4“अपन संगीमन ले सचेत रहव;
5संगी ह संगी ला धोखा देथे,
6तेंह+ 9:6 याने कि यरमियाह* छल-कपट के बीच म रहिथस;
7एकरसेति सर्वसक्तिमान यहोवा ह ये कहत हे:
8ओमन के जीभ ह मिरतू के तीर सहीं अय;
9का मेंह अइसने बात बर ओमन ला सजा नइं दंव?”
10मेंह पहाड़मन बर रोहूं अऊ बिलाप करहूं
11“मेंह यरूसलेम ला एक खंडहर,
12कोन ह अतेक बुद्धिमान ए कि येला समझय? यहोवा ह कोन ला बताय हवय कि ओह येला समझा सकय? देस के काबर बिनास हो गे हवय अऊ मरू-भुइयां सहीं उजाड़ पड़े हवय कि येला कोनो पार नइं कर सकंय?
13यहोवा ह कहिस, “येह एकर कारन होईस काबरकि ओमन मोर ओ कानून ला तियाग दे हवंय, जऊन ला मेंह ओमन के आघू रखे रहेंव; ओमन न तो मोर बात मानिन अऊ न ही मोर कानून के मुताबिक चलिन।
14एकर बदला, ओमन अपन मन के जिद्दी सुभाव के मुताबिक चलिन; ओमन बाल देवतामन के पाछू चलिन, जइसने कि ओमन के पुरखामन ओमन ला सिखाय रिहिन।”
15एकरसेति सर्वसक्तिमान यहोवा, इसरायल के परमेसर ह ये कहत हे: “सुनव, मेंह ये मनखेमन ला करू जेवन खवाहूं अऊ जहरिला पानी पीयाहूं।
16मेंह ओमन ला अइसने देसमन के बीच म तितिर-बितिर कर दूहूं, जेला न तो ओमन अऊ न ही ओमन के पुरखामन जानत रिहिन, अऊ जब तक मेंह ओमन के अन्त नइं कर दूहूं, तब तक मेंह तलवार लेके ओमन के पाछू पड़े रहिहूं।”
17सर्वसक्तिमान यहोवा ह ये कहत हे:
18ओमन जल्दी आवंय
19सियोन ले बिलाप करे के अवाज सुनई देवत हे:
20एकरसेति, हे माईलोगनमन, यहोवा के ये बचन ला सुनव;
21मिरतू ह हमर खिड़कीमन ले होके भीतर आ गे हवय
22तेंह कह, “यहोवा ह ये घोसना करत हे:
23यहोवा ह ये कहत हे:
24पर जऊन ह घमंड करथे, ओह ये बात म घमंड करय:
25“ओ दिनमन आवत हें,” यहोवा ह घोसना करत हे, “जब मेंह ओ जम्मो झन ला सजा दूहूं, जेमन के खतना सिरिप देहें म होय हवय—