1यहोवा ह याकूब+ 14:1 या अपन मनखे इसरायल* ऊपर दया करही;
2जाति-जाति के मनखेमन ओमन ला
3ओ दिन यहोवा ह तुमन ला तुम्हर दुख अऊ घबराहट अऊ ओ कठोर मेहनत ले अराम दीही, जेला तुम्हर ले जबरदस्ती करवाय जावत रिहिस,
4तुमन बेबिलोन के राजा ऊपर ये ताना मारहू:
5यहोवा ह दुस्टमन के सोंटा,
6जेकर ले ओमन गुस्सा होके
7अब पूरा धरती ला अराम अऊ सांति मिले हवय;
8अऊ त अऊ सनोवर अऊ लबानोन के देवदार रूख घलो
9खाल्हे मिरतू-लोक म तुम्हर आय ले
10ओ जम्मो झन जबाब दीहीं,
11तुम्हर जम्मो ठाट-बाट अऊ तुम्हर बीना के अवाज ला
12हे बिहान के तारा, बड़े बिहनियां के बेटा,
13तेंह अपन मन म कहय,
14मेंह बादर ले घलो ऊपर ऊंच जगह म चघहूं;
15पर तेंह मिरतू-लोक म
16जेमन के नजर तोर ऊपर जाथे, ओमन टकटकी लगाके तोला देखथें,
17का येह ओ मनखे अय, जऊन ह संसार ला निरजन प्रदेस बना देवय,
18जाति-जाति के सब राजामन
19पर तेंह कंटिली डाली के सहीं
20तोला ओमन के संग कबर म नइं गाड़े जावय,
21ओमन के पुरखामन के पाप के कारन
22सर्वसक्तिमान यहोवा ह घोसना करत हे,
23“मेंह ओला उल्लूमन के जगह
24सर्वसक्तिमान यहोवा ह सपथ खाके कहे हवय,
25में अस्सूर ला अपन देस म कुटा-कुटा कर दूहूं;
26येह ओ योजना ए, जऊन ह जम्मो संसार बर ठहिराय गे हवय;
27काबरकि सर्वसक्तिमान यहोवा ह योजना बनाय हवय, त कोन ह ओकर बिरोध कर सकथे?
28जऊन बछर आहाज राजा मरिस, ओही बछर ये अगमबानी होईस:
29हे जम्मो पलिस्तीमन, एकर बर आनंदित झन होवव
30तब गरीब ले गरीब मनखे घलो खाय बर पाही,
31हे दुवार, तेंह हाय-हाय कर! हे नगर, तें नरिया!