1देखव, यहोवा ह धरती ला निरजन
2जइसन मनखेमन के,
3धरती ह पूरा सुनसान पड़े होही
4धरती सूख जाथे अऊ मुरझा जाथे,
5धरती अपन मनखेमन के दुवारा असुध हो जाथे;
6येकर कारन धरती ऊपर एक सराप पड़ही;
7नवां अंगूर के मंद सूखा जाथे अऊ अंगूर के नार मुरझा जाथे;
8आनंद के डफली के अवाज ह बंद हो गीस,
9ओमन गीत गावत फेर अंगूर के मंद नइं पीयंय;
10उजरे सहर ह निरजन परे हवय;
11गलीमन म मनखेमन अंगूर के मंद बर हल्ला करत हें;
12सहर ह उजाड़ पड़े हे,
13जइसने जब जैतून रूख ला झारे जाथे,
14ओमन ऊंचहा अवाज म आनंद के मारे जय-जयकार करहीं;
15एकर कारन पूरब म यहोवा के महिमा करव;
16धरती के छोर ले हमन ला अइसन गीत के अवाज सुनई देवत हे:
17हे धरती के मनखेमन,
18जऊन ह घलो आतंक के अवाज ले भागही
19धरती ह टूट गे हवय,
20धरती ह मतवार सहीं लड़खड़ाथे,
21ओ दिन यहोवा ह
22एक काल-कोठरी म बांधे गय कैदीमन सहीं