1ओ दिन,+ 27:1 या दंड के ओ दिन*
2ओ दिन—
3में, यहोवा ह येकर रकछा करथंव;
4मेंह गुस्सा नइं करत हंव।
5या फेर ओमन मोर मेर सरन लेय बर आवंय;
6अवइया दिनमन म याकूब ह जरी धरही,
7का यहोवा ह ओला वइसने मारिस
8लड़ई अऊ बंधुवई के दुवारा तें ओकर संग लड़—
9तब एकर दुवारा, याकूब के अधरम के पछताप करे जाही,
10काबरकि गढ़वाला नगर निरजन हो गे हवय,
11जब येकर छोटे डंगालीमन सूख जाथें, त ओमन टूट जाथें
12ओ दिन यहोवा ह फरात नदी ले लेके मिसर के नरवा तक अपन अनाज ला पछिनही, अऊ हे इसरायलीमन, तुमन एक-एक करके इकट्ठा करे जाहू।