1तोर ऊपर हाय, अरीएल, अरीएल,
2तभो ले मेंह तो अरीएल ला संकट म डारहूं;
3मेंह तोर बिरूध चारों कोति डेरा डालहूं;
4तोला खाल्हे लाने जाही, तेंह भुइयां ले गोठियाबे;
5पर तोर बहुंते बईरीमन बारिक धुर्रा सहीं हो जाहीं,
6सर्वसक्तिमान यहोवा ह गरजत
7तब जम्मो जाति के उपदरवी भीड़, जेमन अरीएल के बिरूध लड़थें,
8येह अइसन होही, जइसे कोनो भूखा मनखे जेवन करे के सपना देखथे,
9ठहर जावव अऊ अचम्भो करव,
10यहोवा ह तुमन ला भारी नींद म डाल देय हवय:
11तुम्हर बर ये पूरा दरसन कुछू नइं, पर एक किताब म लिखे मुहरबंद बचन अय। अऊ कहूं तुमन ये किताब कोनो मनखे ला देथव, जऊन ह पढ़ सकथे, अऊ तुमन कहिथव, “येला पढ़,” अऊ ओह कहिथे, “मेंह नइं पढ़े सकंव, काबरकि येमा मुहर लगे हवय।”
12या कहूं तुमन ये किताब कोनो अइसने मनखे ला देथव जऊन ह पढ़ नइं सकय, अऊ तुमन कहिथव, “येला पढ़,” त ओह जबाब दीही, “मेंह तो पढ़े बर नइं जानंव।”
13परभू ह कहिथे:
14एकरसेति, मेंह ये मनखेमन ला एक बार फेर
15हाय ओमन ऊपर, जेमन अपन चलाकी ला यहोवा ले
16तुमन चीजमन ला उल्टा पुलटा कर देथव,
17का थोरकन समय म ही, लबानोन ह उपजाऊ भुइयां म नइं बदले जाही
18ओ दिन भैंरामन किताब के बात ला सुनहीं,
19एक बार फेर नम्र मनखे ह यहोवा म आनंदित होही;
20निरदयी ह गायब हो जाही,
21जेमन अपन बात से आने मनखे ला दोसी ठहिराथें,
22एकरसेति यहोवा, जऊन ह अब्राहम ला छोंड़ाईस, याकूब के संतानमन ले ये कहत हे:
23जब याकूब के संतानमन अपन बीच