1हे जाति-जाति के मनखेमन, लकठा म आवव अऊ सुनव;
2यहोवा सब जाति के मनखेमन ऊपर रिस करत हवय,
3ओमन के मारे गय मनखेमन ला बाहिर फेंक दिये जाही,
4अकास के जम्मो तारामन खतम हो जाहीं
5मोर तलवार ह अकास म पीके छक गे हवय;
6यहोवा के तलवार लहू ले भर गे हे,
7ओमन के संग जंगली बईलामन,
8काबरकि पलटा लेय बर यहोवा मेर एक दिन हवय,
9एदोम के सोतामन ढलान म बदल जाहीं,
10येह रात अऊ दिन नइं बुताही;
11मरू-भुइयां के उल्लू अऊ चीखनेवाला उल्लू ओमा निवास करहीं;
12ओकर परभावसाली मनखेमन करा उहां अइसे कुछू नइं होही, जेला राजा के राज कहे जा सकय,
13ओकर महलमन म कंटिला रूख,
14उहां मरू-भुइयां के जन्तुमन हुंर्रामन संग बसहीं,
15उहां घुघवा ह खोंधरा बनाही अऊ अंडा दीही,
16यहोवा के किताब म देखव अऊ पढ़व: