1तुम्हर परमेसर ह कहिथे,
2यरूसलेम ला सांत मन से कहव,
3एक झन के बलाय के अवाज आवत हे:
4हर एक घाटी ला पाट दिये जाही,
5तब यहोवा के महिमा ह परगट होही,
6एक अवाज ह कहिथे, “चिचियाके कह!”
7कांदी ह मुरझा जाथे अऊ फूलमन झर जाथें,
8कांदी ह मुरझा जाथे अऊ फूलमन झर जाथें,
9तें, जऊन ह सियोन म सुघर संदेस लाथस,
10देखव, सर्वसक्तिमान यहोवा सामर्थ के संग आवत हे,
11ओह एक चरवाहा सहीं अपन झुंड ला चराथे:
12कोन ह अपन हांथ के हथेली ले महासागर के पानी ला नापे हवय,
13कोन ह यहोवा के आतमा+ 40:13 या मन* के गहरई ला समझ सकत हे,
14यहोवा ह अपन गियान बढ़ाय बर काकर ले सलाह लीस,
15खचित जाति-जाति के मनखेमन बाल्टी म पानी के एक बूंद सहीं अंय;
16लबानोन के रूखमन बेदी के आगी बर परयाप्त नो हंय,
17जम्मो जाति के मनखेमन ओकर आघू म कुछू नो हंय;
18तब तुमन परमेसर के तुलना काकर संग करहू?
19जहां तक एक मूरती के बात ए, एक मूरतीकार ह येला ढालके बनाथे,
20गरीब मनखे, जऊन ह अइसन भेंट नइं चघा सकय,
21का तुमन नइं जानव?
22येह ओ अय, जऊन ह धरती के घेरा के ऊपर बिराजमान होथे,
23ओह हाकिममन ला तुछ कर देथे
24ओमन ला रोपे जावत ही,
25“तुमन काकर संग मोर तुलना करहू?
26अपन आंखी उठाके अकास कोति देखव:
27हे याकूब, तेंह काबर सिकायत करथस?
28का तुमन नइं जानव?
29ओह थके मनखे ला बल देथे
30जवानमन तो थकथें अऊ ओमन ला उबासी आथे,