यसायाह 40:1-30 CGOCV2024 - Bible AI

1तुम्हर परमेसर ह कहिथे,

2यरूसलेम ला सांत मन से कहव,

3एक झन के बलाय के अवाज आवत हे:

4हर एक घाटी ला पाट दिये जाही,

5तब यहोवा के महिमा ह परगट होही,

6एक अवाज ह कहिथे, “चिचियाके कह!”

7कांदी ह मुरझा जाथे अऊ फूलमन झर जाथें,

8कांदी ह मुरझा जाथे अऊ फूलमन झर जाथें,

9तें, जऊन ह सियोन म सुघर संदेस लाथस,

10देखव, सर्वसक्तिमान यहोवा सामर्थ के संग आवत हे,

11ओह एक चरवाहा सहीं अपन झुंड ला चराथे:

12कोन ह अपन हांथ के हथेली ले महासागर के पानी ला नापे हवय,

13कोन ह यहोवा के आतमा+ 40:13 या मन* के गहरई ला समझ सकत हे,

14यहोवा ह अपन गियान बढ़ाय बर काकर ले सलाह लीस,

15खचित जाति-जाति के मनखेमन बाल्टी म पानी के एक बूंद सहीं अंय;

16लबानोन के रूखमन बेदी के आगी बर परयाप्त नो हंय,

17जम्मो जाति के मनखेमन ओकर आघू म कुछू नो हंय;

18तब तुमन परमेसर के तुलना काकर संग करहू?

19जहां तक एक मूरती के बात ए, एक मूरतीकार ह येला ढालके बनाथे,

20गरीब मनखे, जऊन ह अइसन भेंट नइं चघा सकय,

21का तुमन नइं जानव?

22येह ओ अय, जऊन ह धरती के घेरा के ऊपर बिराजमान होथे,

23ओह हाकिममन ला तुछ कर देथे

24ओमन ला रोपे जावत ही,

25“तुमन काकर संग मोर तुलना करहू?

26अपन आंखी उठाके अकास कोति देखव:

27हे याकूब, तेंह काबर सिकायत करथस?

28का तुमन नइं जानव?

29ओह थके मनखे ला बल देथे

30जवानमन तो थकथें अऊ ओमन ला उबासी आथे,