1“येह मोर सेवक ए, जऊन ला में संभालथंव,
2न ओह चिचियाही अऊ न ऊंचहा सबद म बोलही,
3कुचरे सरकंडा ला न तो ओह टोरही,
4ओह नइं डगमगाही अऊ न ही हिम्मत हारही
5परमेसर यहोवा ह ये कहत हे—
6“में, यहोवा ह तोला धरमीपन म बलाय हंव;
7ताकि तें अंधरामन के आंखी ला खोल दे,
8“मेंह यहोवा अंव; येह मोर नांव अय!
9देखव, पहिली के चीजमन हो गे हवंय,
10हे समुंदर म चलइया, अऊ ओमा जम्मो रहइयामन,
11सुनसान जगह अऊ ओमा के नगरमन अपन अवाज ऊंच करव;
12ओमन यहोवा के महिमा परगट करंय
13यहोवा ह एक बिजेता के सहीं निकलही,
14“बहुंत समय तक मेंह चुप रहेंव,
15मेंह पहाड़ अऊ पहाड़ीमन ला उजार दूहूं
16मेंह अंधरामन ला ओ रसता म ले जाहूं जऊन ला ओमन नइं जानंय,
17पर जेमन मूरतीमन ऊपर भरोसा करथें,
18“हे भैंरामन, सुनव;
19मोर सेवक के छोंड़ कोन अंधरा अय,
20तेंह बहुंते चीजमन ला देखे हस, पर तें धियान नइं देवस;
21यहोवा ला अपन धरमीपन बर
22पर येमन एक लूटे अऊ छीने गय मनखे अंय,
23तुमन म ले कोन ह येला सुनही
24कोन ह याकूब ला लूट के चीज होय बर दे दीस,