1“पर अब, हे मोर दास याकूब,
2यहोवा ह ये कहत हे—
3काबरकि में पीयासन भुइयां म पानी
4ओमन चरागन म कांदी सहीं,
5कोनो कहिही, ‘में यहोवा के अंव’;
6“सर्वसक्तिमान यहोवा, जऊन ह इसरायल के राजा अऊ छुड़इया अय,
7मोर सहीं कोन हे? ओह येला बतावय।
8झन कांपव, झन डरव।
9ओ जम्मो जेमन मूरतीमन ला बनाथें, ओमन कुछू नो हंय,
10कोन ह एक देवता ला आकार देथे अऊ मूरती ला बनाथे,
11ओ मनखे, जेमन ओ काम करथें, ओमन लज्जा म पड़हीं;
12लोहार ह एक ठन औजार ला लेथे
13बढ़ई ह अपन नाप ले नापथे
14ओह देवदार रूख ला काटथे,
15तब ओह आगी बारे के काम आथे;
16आधा लकरी ला तो ओह आगी बारथे;
17अऊ बाकि बांचे लकरी ले ओह एक देवता, अपन बर मूरती बनाथे;
18ओमन कुछू नइं जानंय, ओमन कुछू नइं समझंय;
19सोच-बिचार करे बर कोनो नइं रूकंय,
20अइसन मनखे ह राख ला खाथे; ओकर मन ह भटक गे हे अऊ ओला गलत रसता म ले जाथे;
21“हे याकूब, हे इसरायल, ये बातमन ला सुरता कर,
22मेंह तोर अपराधमन ला बादर सहीं,
23हे अकासमन, आनंद के मारे गावव, काबरकि यहोवा ह ये काम करे हवय;
24यहोवा, तोर छुड़इया,
25जऊन ह लबरा अगमजानीमन के चिनहां ला बेकार कर देथे
26जऊन ह अपन सेवक के बचन ला पूरा करथे
27जऊन ह गहिला पानी ला कहिथे, ‘सूखा जा,