1“हे याकूब के संतानमन, ये बात ला सुनव,
2तुमन जेमन अपनआप ला पबितर सहर के नागरिक बताथव
3बहुंत पहिले मेंह पहिले के बातमन ला बताय हंव,
4काबरकि मेंह जानत रहेंव कि तुमन कतेक ढीठ रहेव;
5एकर कारन बहुंत पहिले, मेंह ये बातमन ला तुमन ला बताएंव;
6तुमन ये बातमन ला सुने हवव; ओ जम्मो चीज ला देखव।
7ओमन अभी सिरजे गे हवंय, बहुंत पहिले ले नइं;
8तेंह ओमन के बारे न तो सुने, अऊ न ही समझे हस;
9अपन नांव बर मेंह कोप करे म देरी करथंव;
10देख, मेंह तोला साफ करे हंव, हालाकि चांदी के सहीं नइं;
11अपन हित म, हव, अपनेच हित म, मेंह ये करत हंव।
12“हे याकूब, हे इसरायल,
13मोर खुद के हांथ ह धरती के नीव डारिस,
14“तुमन सब के सब एक संग आवव, अऊ सुनव:
15में, हव, मेंह कहे हंव;
16“मोर लकठा म आके ये बात ला सुनव:
17यहोवा, तोर छुड़इया,
18कहूं तें मोर हुकूम ला धियान देय रहिते,
19तोर संतानमन बालू के सहीं होतिन,
20बेबिलोन ला छोंड़ दव,
21जब यहोवा ह अपन मनखेमन ला मरू-भुइयां म ले होके ले गीस,