यसायाह 60:1-21 CGOCV2024 - Bible AI

1“उठ, चमकदार हो; काबरकि तोर अंजोर ह आय हवय,

2देख, धरती ऊपर अंधियार

3जाति-जाति के मनखेमन तोर मेर अंजोर बर,

4“अपन चारों कोति आंखी उठाके देख:

5तब तें देखबे अऊ तें चमकबे,

6तोर देस ह ऊंटमन के झुंड ले भर जाही,

7केदार छेत्र के पसुमन के झुंड ला तोर मेर इकट्ठा करे जाही,

8“येमन कोन अंय, जेमन बादर सहीं,

9सच म द्वीपमन मोर रसता देखथें;

10“परदेसीमन तोर सहर के दीवार ला फेर बनाहीं,

11तोर दुवारमन हरदम खुला रहिहीं,

12काबरकि जऊन जाति या राज के मन तोर सेवा नइं करहीं, ओमन नास हो जाहीं;

13“लबानोन के वैभव तोर मेर आही,

14तोला दुख देवइयामन के लइकामन मुड़ नवाके तोर मेर आहीं;

15“हालाकि तोला छोंड़ दिये गे हवय अऊ तोर ले घिन करे जाथे,

16तें जाति-जाति के मनखेमन के दूध पीबे

17में कांसा के बदला सोन,

18तोर देस म फेर कभू हिंसा के बात

19दिन म सूरज ह फेर तोर अंजोर नइं होही,

20तोर सूरज फेर कभू नइं बुड़ही,

21तब तोर मनखेमन सब के सब धरमी होहीं