1येह कोन ए, जऊन ह एदोम देस के बोसरा नगर ले आवत हे
2तुम्हर ओनहा ह काबर लाल हवय,
3“मेंह अकेला रसकुंड म अंगूर रऊंदे हंव;
4येह मोर बर बदला लेय के दिन रिहिस;
5मेंह खोजेंव पर कोनो मदद करइया नइं रिहिन,
6हां, अपन रिस म आके देस-देस के मनखेमन ला कुचरेंव;
7मेंह यहोवा के दया के काम के बखान करहूं,
8यहोवा ह कहिस, “सही म ओमन मोर मनखे अंय,
9ओमन के सबो दुख म ओह घलो दुख उठाईस,
10तभो ले ओमन बिदरोह करिन
11तब ओकर मनखेमन पुराना दिनमन ला,
12जऊन ह अपन परतापी भुजबल ला
13जऊन ह ओमन ला गहिला समुंदर म ले होके ले गीस?
14जइसन घरेलू-पसुमन खाल्हे मैदान म चले जाथें,
15स्वरग ले, अपन ऊंच सिंघासन ले, जऊन ह पबितर
16पर तें हमर ददा अस,
17हे यहोवा, तें काबर हमन ला अपन रद्दा ले भटका देथस
18थोरकन समय तक तोर मनखेमन तोर पबितर जगह ऊपर अधिकार रखिन,