1सियोन म तुरही फूंकव;
2ओ दिन ह अंधियार अऊ धुंधलापन के दिन अय,
3ओमन के आघू म आगी ह बिनास के काम करथे,
4ओमन घोड़ामन सहीं दिखथें;
5रथमन सहीं अवाज के संग
6ओमन के नजर पड़त ही जाति-जाति के मनखेमन पीरा म पड़ जाथें;
7ओमन योद्धा सहीं हमला करथें;
8ओमन एक-दूसर ला नइं ढकेलंय;
9ओमन तेजी ले सहर म घुसरथें;
10ओमन के आघू म धरती ह डोल जाथे,
11यहोवा ह अपन सेना के आघू म होके
12“तभो ले अब,” यहोवा ह घोसना करत हे,
13अपन कपड़ामन ला नइं,
14कोन जाने? ओह अपन बिचार ला बदलके नमरता देखाय
15सियोन म तुरही फूंकव,
16मनखेमन ला इकट्ठा करव,
17पुरोहित, जेमन यहोवा के आघू म सेवा करथें,
18तब यहोवा ला अपन देस बर जलन होईस
19यहोवा ह ओमन ला जबाब दीस:
20“मेंह उत्तर के उपदरवी दल ला तुम्हर ले दूरिहा भगा दूहूं,
21हे यहूदा देस, झन डर;
22हे जंगली पसुमन, झन डरव,
23हे सियोन के मनखेमन, खुस रहव,
24कोठार ह अनाज ले भर जाही;
25“मेंह तुमन ला ओ जम्मो बछर के फसल के भरपई कर दूहूं, जऊन ला फांफामन खा ले हवंय—
26तुम्हर करा खाय बर बहुंत जेवन होही अऊ तुमन पेट भर खाहू,
27तब तुमन जानहू कि मेंह इसरायल म हवंव,
28“अऊ ओकर बाद,
29मेंह अपन दास अऊ अपन दासीमन ऊपर घलो
30मेंह ऊपर अकास म
31यहोवा के महान अऊ भयानक दिन के आय के पहिली