1सिग्योनोत* के रीति म, हबक्कूक अगमजानी के एक पराथना।
2हे यहोवा, मेंह तोर बड़ई ला सुने हंव;
3परमेसर ह तेमान देस ले आईस,
4ओकर सोभा ह सूरज निकले सहीं रिहिस;
5ओकर आघू-आघू महामारी फईलत जात रिहिस;
6ओह ठाढ़ होके धरती ला कंपा दीस;
7मेंह कूसान के तम्बू म रहइयामन ला दुख म,
8हे यहोवा, का तेंह नदीमन ऊपर गुस्सा करे?
9तेंह अपन धनुस ला ओकर खोल ले निकाले,
10पहाड़मन तोला देखके कांप गीन।
11तोर उड़त तीरमन के चमक ले,
12तेंह कोरोध म आके धरती ऊपर तेजी से रेंगय
13तेंह अपन मनखेमन के छुटकारा,
14तेंह ओकरेच भाला ले ओकर मुड़ ला छेद देय
15तेंह अपन घोड़ामन के दुवारा समुंदर ला खदमदात,
16मेंह सुनेंव अऊ मोर मन ह टूट गीस,
17चाहे अंजीर के रूख म अंकुर झन निकलय
18तभो ले मेंह यहोवा म आनंद मनाहूं,
19परमपरधान यहोवा ह मोर बल अय;