यौम-ए-कफ़्फ़ारा
1जब हारून के दो बेटे रब के क़रीब आ कर हलाक हुए तो इस के बाद रब मूसा से हमकलाम हुआ।
2उस ने कहा,
3और जब भी वह दाख़िल हो तो गुनाह की क़ुर्बानी के लिए एक जवान बैल और भस्म होने वाली क़ुर्बानी के लिए एक मेंढा पेश करे।
4पहले वह नहा कर इमाम के कतान के मुक़द्दस कपड़े पहन ले यानी ज़ेरजामा, उस के नीचे पाजामा, फिर कमरबन्द और पगड़ी।
5इस्राईल की जमाअत हारून को गुनाह की क़ुर्बानी के लिए दो बकरे और भस्म होने वाली क़ुर्बानी के लिए एक मेंढा दे।
6पहले हारून अपने और अपने घराने के लिए जवान बैल को गुनाह की क़ुर्बानी के तौर पर चढ़ाए।
7फिर वह दोनों बकरों को मुलाक़ात के ख़ैमे के दरवाज़े पर रब के सामने ले आए।
8वहाँ वह क़ुरआ डाल कर एक को रब के लिए चुने और दूसरे को अज़ाज़ेल के लिए।
9जो बकरा रब के लिए है उसे वह गुनाह की क़ुर्बानी के तौर पर पेश करे।
10दूसरा बकरा जो क़ुरए के ज़रीए अज़ाज़ेल के लिए चुना गया उसे ज़िन्दा हालत में रब के सामने खड़ा किया जाए ताकि वह जमाअत का कफ़्फ़ारा दे। वहाँ से उसे रेगिस्तान में अज़ाज़ेल के पास भेजा जाए।
11लेकिन पहले हारून जवान बैल को गुनाह की क़ुर्बानी के तौर पर चढ़ा कर अपना और अपने घराने का कफ़्फ़ारा दे। उसे ज़बह करने के बाद
12वह बख़ूर की क़ुर्बानगाह से जलते हुए कोएलों से भरा हुआ बर्तन ले कर अपनी दोनों मुट्ठियाँ बारीक ख़ुश्बूदार बख़ूर से भर ले और मुक़द्दसतरीन कमरे में दाख़िल हो जाए।
13वहाँ वह रब के हुज़ूर बख़ूर को जलते हुए कोएलों पर डाल दे। इस से पैदा होने वाला धुआँ अह्द के सन्दूक़ का ढकना छुपा देगा ताकि हारून मर न जाए।
14अब वह जवान बैल के ख़ून में से कुछ ले कर अपनी उंगली से ढकने के सामने वाले हिस्से पर छिड़के, फिर कुछ अपनी उंगली से सात बार उस के सामने ज़मीन पर छिड़के।
15इस के बाद वह उस बकरे को ज़बह करे जो क़ौम के लिए गुनाह की क़ुर्बानी है। वह उस का ख़ून मुक़द्दसतरीन कमरे में ले आए और उसे बैल के ख़ून की तरह अह्द के सन्दूक़ के ढकने पर और सात बार उस के सामने ज़मीन पर छिड़के।
16यूँ वह मुक़द्दसतरीन कमरे का कफ़्फ़ारा देगा जो इस्राईलियों की नापाकियों और तमाम गुनाहों से मुतअस्सिर होता रहता है। इस से वह मुलाक़ात के पूरे ख़ैमे का भी कफ़्फ़ारा देगा जो ख़ैमागाह के दरमियान होने के बाइस इस्राईलियों की नापाकियों से मुतअस्सिर होता रहता है।
17जितना वक़्त हारून अपना, अपने घराने का और इस्राईल की पूरी जमाअत का कफ़्फ़ारा देने के लिए मुक़द्दसतरीन कमरे में रहेगा इस दौरान किसी दूसरे को मुलाक़ात के ख़ैमे में ठहरने की इजाज़त नहीं है।
18फिर वह मुक़द्दसतरीन कमरे से निकल कर ख़ैमे में रब के सामने पड़ी क़ुर्बानगाह का कफ़्फ़ारा दे। वह बैल और बकरे के ख़ून में से कुछ ले कर उसे क़ुर्बानगाह के चारों सींगों पर लगाए।
19कुछ ख़ून वह अपनी उंगली से सात बार उस पर छिड़क दे। यूँ वह उसे इस्राईलियों की नापाकियों से पाक करके मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस करेगा।
20मुक़द्दसतरीन कमरे, मुलाक़ात के ख़ैमे और क़ुर्बानगाह का कफ़्फ़ारा देने के बाद हारून ज़िन्दा बकरे को सामने लाए।
21वह अपने दोनों हाथ उस के सर पर रखे और इस्राईलियों के तमाम क़ुसूर यानी उन के तमाम जराइम और गुनाहों का इक़्रार करके उन्हें बकरे के सर पर डाल दे। फिर वह उसे रेगिस्तान में भेज दे। इस के लिए वह बकरे को एक आदमी के सपुर्द करे जिसे यह ज़िम्मादारी दी गई है।
22बकरा अपने आप पर उन का तमाम क़ुसूर उठा कर किसी वीरान जगह में ले जाएगा। वहाँ साथ वाला आदमी उसे छोड़ आए।
23इस के बाद हारून मुलाक़ात के ख़ैमे में जाए और कतान के वह कपड़े जो उस ने मुक़द्दसतरीन कमरे में दाख़िल होने से पेशतर पहन लिए थे उतार कर वहीं छोड़ दे।
24वह मुक़द्दस जगह पर नहा कर अपनी ख़िदमत के आम कपड़े पहन ले। फिर वह बाहर आ कर अपने और अपनी क़ौम के लिए भस्म होने वाली क़ुर्बानी पेश करे ताकि अपना और अपनी क़ौम का कफ़्फ़ारा दे।
25इस के इलावा वह गुनाह की क़ुर्बानी की चर्बी क़ुर्बानगाह पर जला दे।
26जो आदमी अज़ाज़ेल के लिए बकरे को रेगिस्तान में छोड़ आया है वह अपने कपड़े धो कर नहा ले। इस के बाद वह ख़ैमागाह में आ सकता है।
27जिस बैल और बकरे को गुनाह की क़ुर्बानी के लिए पेश किया गया और जिन का ख़ून कफ़्फ़ारा देने के लिए मुक़द्दसतरीन कमरे में लाया गया, लाज़िम है कि उन की खालें, गोश्त और गोबर ख़ैमागाह के बाहर जला दिया जाए।
28यह चीज़ें जलाने वाला बाद में अपने कपड़े धो कर नहा ले। फिर वह ख़ैमागाह में आ सकता है।
29लाज़िम है कि सातवें महीने के दसवें दिन इस्राईली और उन के दरमियान रहने वाले परदेसी अपनी जान को दुख दें और काम न करें। यह उसूल तुम्हारे लिए अबद तक क़ाइम रहे।
30इस दिन तुम्हारा कफ़्फ़ारा दिया जाएगा ताकि तुम्हें पाक किया जाए। तब तुम रब के सामने अपने तमाम गुनाहों से पाक ठहरोगे।
31पूरा दिन आराम करो और अपनी जान को दुख दो। यह उसूल अबद तक क़ाइम रहे।
32इस दिन इमाम-ए-आज़म तुम्हारा कफ़्फ़ारा दे, वह इमाम जिसे उस के बाप की जगह मसह किया गया और इख़तियार दिया गया है। वह कतान के मुक़द्दस कपड़े पहन कर
33मुक़द्दसतरीन कमरे, मुलाक़ात के ख़ैमे, क़ुर्बानगाह, इमामों और जमाअत के तमाम लोगों का कफ़्फ़ारा दे।
34लाज़िम है कि साल में एक दफ़ा इस्राईलियों के तमाम गुनाहों का कफ़्फ़ारा दिया जाए। यह उसूल तुम्हारे लिए अबद तक क़ाइम रहे।”