आमूस 8:1-14 DGV - Bible AI

पके फल से भरी टोकरी

1एक बार फिर रब क़ादिर-ए-मुतलक़ ने मुझे रोया दिखाई। मैं ने पके हुए फल से भरी हुई टोकरी देखी।

2रब ने पूछा, “ऐ आमूस, तुझे क्या नज़र आता है?” मैं ने जवाब दिया, “पके हुए फल से भरी हुई टोकरी।” तब रब ने मुझ से फ़रमाया, “मेरी क़ौम का अन्जाम पक गया है। अब से मैं उन्हें सज़ा दिए बग़ैर नहीं छोड़ूँगा।

3रब क़ादिर-ए-मुतलक़ फ़रमाता है कि उस दिन महल में गीत सुनाई नहीं देंगे बल्कि आह-ओ-ज़ारी। चारों तरफ़ नाशें नज़र आएँगी, क्यूँकि दुश्मन उन्हें हर जगह फैंकेगा। ख़ामोश!”

अवाम का इस्तेह्साल

4ऐ ग़रीबों को कुचलने वालो, ऐ ज़रूरतमन्दों को तबाह करने वालो, सुनो!

5तुम कहते हो, “नए चाँद की ईद कब गुज़र जाएगी, सबत का दिन कब ख़त्म है ताकि हम अनाज के गोदाम खोल कर ग़ल्ला बेच सकें? तब हम पैमाइश के बर्तन छोटे और तराज़ू के बाट हल्के बनाएँगे, साथ साथ सौदे का भाओ बढ़ाएँगे। हम फ़रोख़्त करते वक़्त अनाज के साथ उस का भूसा भी मिलाएँगे।” अपने नाजाइज़ तरीक़ों से तुम थोड़े पैसों में बल्कि एक जोड़ी जूतों के इवज़ ग़रीबों को ख़रीदते हो।

7रब ने याक़ूब के फ़ख़र की क़सम खा कर वादा किया है, “जो कुछ उन से सरज़द हुआ है उसे मैं कभी नहीं भूलूँगा।

8उन ही की वजह से ज़मीन लरज़ उठेगी और उस के तमाम बाशिन्दे मातम करेंगे। जिस तरह मिस्र में दरया-ए-नील बरसात के मौसम में सैलाबी सूरत इख़तियार कर लेता है उसी तरह पूरी ज़मीन उठेगी। वह नील की तरह जोश में आएगी, फिर दुबारा उतर जाएगी।”

9रब क़ादिर-ए-मुतलक़ फ़रमाता है, “उस दिन मैं होने दूँगा कि सूरज दोपहर के वक़्त ग़ुरूब हो जाए। दिन उरूज पर ही होगा तो ज़मीन पर अंधेरा छा जाएगा।

10मैं तुम्हारे तहवारों को मातम में और तुम्हारे गीतों को आह-ओ-बुका में बदल दूँगा। मैं सब को टाट के मातमी लिबास पहना कर हर एक का सर मुंडवाऊँगा। लोग यूँ मातम करेंगे जैसा उन का वाहिद बेटा कूच कर गया हो। अन्जाम का वह दिन कितना तल्ख़ होगा।”

अल्लाह आइन्दा जवाब नहीं देगा

11क़ादिर-ए-मुतलक़ फ़रमाता है, “ऐसे दिन आने वाले हैं जब मैं मुल्क में काल भेजूँगा। लेकिन लोग न रोटी और न पानी से बल्कि अल्लाह का कलाम सुनने से महरूम रहेंगे।

12लोग लड़खड़ाते हुए एक समुन्दर से दूसरे तक और शिमाल से मशरिक़ तक फिरेंगे ताकि रब का कलाम मिल जाए, लेकिन बेसूद।

13उस दिन ख़ूबसूरत कुंवारियाँ और जवान मर्द प्यास के मारे बेहोश हो जाएंगे।

14जो इस वक़्त सामरिया के मकरूह बुत की क़सम खाते और कहते हैं, ‘ऐ दान, तेरे देवता की हयात की क़सम’ या ‘ऐ बैर-सबा, तेरे देवता की क़सम!’ वह उस वक़्त गिर जाएंगे और दुबारा कभी नहीं उठेंगे।”

This work is licensed under a Creative Commons Attribution - No Derivatives 4.0 International License. info@urdugeoversion.com
div>