इस्तिस्ना 16:1-22 DGV - Bible AI

फ़सह की ईद

1अबीब के महीने[५] में रब अपने ख़ुदा की ताज़ीम में फ़सह की ईद मनाना, क्यूँकि इस महीने में वह तुझे रात के वक़्त मिस्र से निकाल लाया।

2उस जगह जमा हो जा जो रब अपने नाम की सुकूनत के लिए चुनेगा। उसे क़ुर्बानी के लिए भेड़-बकरियाँ या गाय-बैल पेश करना।

3गोश्त के साथ बेख़मीरी रोटी खाना। सात दिन तक यही रोटी खा, बिलकुल उसी तरह जिस तरह तू ने किया जब जल्दी जल्दी मिस्र से निकला। मुसीबत की यह रोटी इस लिए खा ताकि वह दिन तेरे जीते जी याद रहे जब तू मिस्र से रवाना हुआ।

4लाज़िम है कि ईद के हफ़्ते के दौरान तेरे पूरे मुल्क में ख़मीर न पाया जाए।

4जो क़ुर्बानी तू ईद के पहले दिन की शाम को पेश करे उस का गोश्त उसी वक़्त खा ले। अगली सुब्ह तक कुछ बाक़ी न रह जाए।

5फ़सह की क़ुर्बानी किसी भी शहर में जो रब तेरा ख़ुदा तुझे देगा न चढ़ाना

6बल्कि सिर्फ़ उस जगह जो वह अपने नाम की सुकूनत के लिए चुनेगा। मिस्र से निकलते वक़्त की तरह क़ुर्बानी के जानवर को सूरज डूबते वक़्त ज़बह कर।

7फिर उसे भून कर उस जगह खाना जो रब तेरा ख़ुदा चुनेगा। अगली सुब्ह अपने घर वापस चला जा।

8ईद के पहले छः दिन बेख़मीरी रोटी खाता रह। सातवें दिन काम न करना बल्कि रब अपने ख़ुदा की इबादत के लिए जमा हो जाना।

फ़सल की कटाई की ईद

9जब अनाज की फ़सल की कटाई शुरू होगी तो पहले दिन के सात हफ़्ते बाद

10फ़सल की कटाई की ईद मनाना। रब अपने ख़ुदा को उतना पेश कर जितना जी चाहे। वह उस बरकत के मुताबिक़ हो जो उस ने तुझे दी है।

11इस के लिए भी उस जगह जमा हो जा जो रब अपने नाम की सुकूनत के लिए चुनेगा। वहाँ उस के हुज़ूर ख़ुशी मना। तेरे बाल-बच्चे, तेरे ग़ुलाम और लौंडियाँ और तेरे शहरों में रहने वाले लावी, परदेसी, यतीम और बेवाएँ सब तेरी ख़ुशी में शरीक हों।

12इन अह्काम पर ज़रूर अमल करना और मत भूलना कि तू मिस्र में ग़ुलाम था।

झोंपड़ियों की ईद

13अनाज गाहने और अंगूर का रस निकालने के बाद झोंपड़ियों की ईद मनाना जिस का दौरानिया सात दिन हो।

14ईद के मौक़े पर ख़ुशी मनाना। तेरे बाल-बच्चे, तेरे ग़ुलाम और लौंडियाँ और तेरे शहरों में बसने वाले लावी, परदेसी, यतीम और बेवाएँ सब तेरी ख़ुशी में शरीक हों।

15जो जगह रब तेरा ख़ुदा मक़्दिस के लिए चुनेगा वहाँ उस की ताज़ीम में सात दिन तक यह ईद मनाना। क्यूँकि रब तेरा ख़ुदा तेरी तमाम फ़सलों और मेहनत को बरकत देगा, इस लिए ख़ूब ख़ुशी मनाना।

16इस्राईल के तमाम मर्द साल में तीन मर्तबा उस मक़्दिस पर हाज़िर हो जाएँ जो रब तेरा ख़ुदा चुनेगा यानी बेख़मीरी रोटी की ईद, फ़सल की कटाई की ईद और झोंपड़ियों की ईद पर। कोई भी रब के हुज़ूर ख़ाली हाथ न आए।

17हर कोई उस बरकत के मुताबिक़ दे जो रब तेरे ख़ुदा ने उसे दी है।

क़ाज़ी मुक़र्रर करना

18अपने अपने क़बाइली इलाक़े में क़ाज़ी और निगहबान मुक़र्रर कर। वह हर उस शहर में हों जो रब तेरा ख़ुदा तुझे देगा। वह इन्साफ़ से लोगों की अदालत करें।

19न किसी के हुक़ूक़ मारना, न जानिबदारी दिखाना। रिश्वत क़बूल न करना, क्यूँकि रिश्वत दानिशमन्दों को अंधा कर देती और रास्तबाज़ की बातें पलट देती है।

20सिर्फ़ और सिर्फ़ इन्साफ़ के मुताबिक़ चल ताकि तू जीता रहे और उस मुल्क पर क़ब्ज़ा करे जो रब तेरा ख़ुदा तुझे देगा।

बुतपरस्ती की सज़ा

21जहाँ तू रब अपने ख़ुदा के लिए क़ुर्बानगाह बनाएगा वहाँ न यसीरत देवी की पूजा के लिए लकड़ी का खम्बा

22और न कोई ऐसा पत्थर खड़ा करना जिस की पूजा लोग करते हैं। रब तेरा ख़ुदा इन चीज़ों से नफ़रत रखता है।