इस्तिस्ना 19:1-21 DGV - Bible AI

पनाह के शहर

1रब तेरा ख़ुदा उस मुल्क में आबाद क़ौमों को तबाह करेगा जो वह तुझे दे रहा है। जब तू उन्हें भगा कर उन के शहरों और घरों में आबाद हो जाएगा

2तो पूरे मुल्क को तीन हिस्सों में तक़्सीम कर। हर हिस्से में एक मर्कज़ी शहर मुक़र्रर कर। उन तक पहुँचाने वाले रास्ते साफ़-सुथरे रखना। इन शहरों में हर वह शख़्स पनाह ले सकता है जिस के हाथ से कोई ग़ैरइरादी तौर पर हलाक हुआ है।

4वह ऐसे शहर में जा कर इन्तिक़ाम लेने वालों से मह्फ़ूज़ रहेगा। शर्त यह है कि उस ने न क़सदन और न दुश्मनी के बाइस किसी को मार दिया हो।

5मसलन दो आदमी जंगल में दरख़्त काट रहे हैं। कुल्हाड़ी चलाते वक़्त एक की कुल्हाड़ी दस्ते से निकल कर उस के साथी को लग जाए और वह मर जाए। ऐसा शख़्स फ़रार हो कर ऐसे शहर में पनाह ले सकता है ताकि बचा रहे।

6इस लिए ज़रूरी है कि ऐसे शहरों का फ़ासिला ज़्यादा न हो। क्यूँकि जब इन्तिक़ाम लेने वाला उस का ताक़्क़ुब करेगा तो ख़तरा है कि वह तैश में उसे पकड़ कर मार डाले, अगरचे भागने वाला बेक़ुसूर है। जो कुछ उस ने किया वह दुश्मनी के सबब से नहीं बल्कि ग़ैरइरादी तौर पर हुआ।

7इस लिए लाज़िम है कि तू पनाह के तीन शहर अलग कर ले।

8बाद में रब तेरा ख़ुदा तेरी सरहद्दें मज़ीद बढ़ा देगा, क्यूँकि यही वादा उस ने क़सम खा कर तेरे बापदादा से किया है। अपने वादे के मुताबिक़ वह तुझे पूरा मुल्क देगा,

9अलबत्ता शर्त यह है कि तू एहतियात से उन तमाम अह्काम की पैरवी करे जो मैं तुझे आज दे रहा हूँ। दूसरे अल्फ़ाज़ में शर्त यह है कि तू रब अपने ख़ुदा को प्यार करे और हमेशा उस की राहों में चलता रहे। अगर तू ऐसा ही करे और नतीजतन रब का वादा पूरा हो जाए तो लाज़िम है कि तू पनाह के तीन और शहर अलग कर ले।

10वर्ना तेरे मुल्क में जो रब तेरा ख़ुदा तुझे मीरास में दे रहा है बेक़ुसूर लोगों को जान से मारा जाएगा और तू ख़ुद ज़िम्मादार ठहरेगा।

11लेकिन हो सकता है कोई दुश्मनी के बाइस किसी की ताक में बैठ जाए और उस पर हम्ला करके उसे मार डाले। अगर क़ातिल पनाह के किसी शहर में भाग कर पनाह ले

12तो उस के शहर के बुज़ुर्ग इत्तिला दें कि उसे वापस लाया जाए। उसे इन्तिक़ाम लेने वाले के हवाले किया जाए ताकि उसे सज़ा-ए-मौत मिले।

13उस पर रहम मत करना। लाज़िम है कि तू इस्राईल में से बेक़ुसूर की मौत का दाग़ मिटाए ताकि तू ख़ुशहाल रहे।

ज़मीनों की हद्दें

14जब तू उस मुल्क में रहेगा जो रब तेरा ख़ुदा तुझे मीरास में देगा ताकि तू उस पर क़ब्ज़ा करे तो ज़मीन की वह हद्दें आगे पीछे न करना जो तेरे बापदादा ने मुक़र्रर कीं।

अदालत में गवाह

15तू किसी को एक ही गवाह के कहने पर क़ुसूरवार नहीं ठहरा सकता। जो भी जुर्म सरज़द हुआ है, कम अज़ कम दो या तीन गवाहों की ज़रूरत है। वर्ना तू उसे क़ुसूरवार नहीं ठहरा सकता।

16अगर जिस पर इल्ज़ाम लगाया गया है इन्कार करके दावा करे कि गवाह झूट बोल रहा है

17तो दोनों मक़्दिस में रब के हुज़ूर आ कर ख़िदमत करने वाले इमामों और क़ाज़ियों को अपना मुआमला पेश करें।

18क़ाज़ी इस का ख़ूब खोज लगाएँ। अगर बात दुरुस्त निकले कि गवाह ने झूट बोल कर अपने भाई पर ग़लत इल्ज़ाम लगाया है

19तो उस के साथ वह कुछ किया जाए जो वह अपने भाई के लिए चाह रहा था। यूँ तू अपने दरमियान से बुराई मिटा देगा।

20फिर तमाम बाक़ी लोग यह सुन कर डर जाएंगे और आइन्दा तेरे दरमियान ऐसी ग़लत हरकत करने की जुरअत नहीं करेंगे।

21क़ुसूरवार पर रहम न करना। उसूल यह हो कि जान के बदले जान, आँख के बदले आँख, दाँत के बदले दाँत, हाथ के बदले हाथ, पाँओ के बदले पाँओ।