इस्तिस्ना 30:1-20 DGV - Bible AI

तौबा के मुसबत नतीजे

1मैं ने तुझे बताया है कि तेरे लिए क्या कुछ बरकत का और क्या कुछ लानत का बाइस है। जब रब तेरा ख़ुदा तुझे तेरी ग़लत हरकतों के सबब से मुख़्तलिफ़ क़ौमों में मुन्तशिर कर देगा तो तू मेरी बातें मान जाएगा।

2तब तू और तेरी औलाद रब अपने ख़ुदा के पास वापस आएँगे और पूरे दिल-ओ-जान से उस की सुन कर उन तमाम अह्काम पर अमल करेंगे जो मैं आज तुझे दे रहा हूँ।

3फिर रब तेरा ख़ुदा तुझे बहाल करेगा और तुझ पर रहम करके तुझे उन तमाम क़ौमों से निकाल कर जमा करेगा जिन में उस ने तुझे मुन्तशिर कर दिया था।

4हाँ, रब तेरा ख़ुदा तुझे हर जगह से जमा करके वापस लाएगा, चाहे तू सब से दूर मुल्क में क्यूँ न पड़ा हो।

5वह तुझे तेरे बापदादा के मुल्क में लाएगा, और तू उस पर क़ब्ज़ा करेगा। फिर वह तुझे तेरे बापदादा से ज़्यादा कामयाबी बख़्शेगा, और तेरी तादाद ज़्यादा बढ़ाएगा।

6ख़तना रब की क़ौम का ज़ाहिरी निशान है। लेकिन उस वक़्त रब तेरा ख़ुदा तेरे और तेरी औलाद का बातिनी ख़तना करेगा ताकि तू उसे पूरे दिल-ओ-जान से प्यार करे और जीता रहे।

7जो लानतें रब तेरा ख़ुदा तुझ पर लाया था उन्हें वह अब तेरे दुश्मनों पर आने देगा, उन पर जो तुझ से नफ़रत रखते और तुझे ईज़ा पहुँचाते हैं।

8क्यूँकि तू दुबारा रब की सुनेगा और उस के तमाम अह्काम की पैरवी करेगा जो मैं तुझे आज दे रहा हूँ।

9जो कुछ भी तू करेगा उस में रब तुझे बड़ी कामयाबी बख़्शेगा, और तुझे कस्रत की औलाद, मवेशी और फ़सलें हासिल होंगी। क्यूँकि जिस तरह वह तेरे बापदादा को कामयाबी देने में ख़ुशी मह्सूस करता था उसी तरह वह तुझे भी कामयाबी देने में ख़ुशी मह्सूस करेगा।

10शर्त सिर्फ़ यह है कि तू रब अपने ख़ुदा की सुने, शरीअत में दर्ज उस के अह्काम पर अमल करे और पूरे दिल-ओ-जान से उस की तरफ़ रुजू लाए।

11जो अह्काम मैं आज तुझे दे रहा हूँ न वह हद से ज़्यादा मुश्किल हैं, न तेरी पहुँच से बाहर।

12वह आसमान पर नहीं हैं कि तू कहे, ‘कौन आसमान पर चढ़ कर हमारे लिए यह अह्काम नीचे ले आए ताकि हम उन्हें सुन सकें और उन पर अमल कर सकें?’

13वह समुन्दर के पार भी नहीं हैं कि तू कहे, ‘कौन समुन्दर को पार करके हमारे लिए यह अह्काम लाएगा ताकि हम उन्हें सुन सकें और उन पर अमल कर सकें?’

14क्यूँकि यह कलाम तेरे निहायत क़रीब बल्कि तेरे मुँह और दिल में मौजूद है। चुनाँचे उस पर अमल करने में कोई भी रुकावट नहीं है।

ज़िन्दगी या मौत का चुनाओ

15देख, आज मैं तुझे दो रास्ते पेश करता हूँ। एक ज़िन्दगी और ख़ुशहाली की तरफ़ ले जाता है जबकि दूसरा मौत और हलाकत की तरफ़।

16आज मैं तुझे हुक्म देता हूँ कि रब अपने ख़ुदा को प्यार कर, उस की राहों पर चल और उस के अह्काम के ताबे रह। फिर तू ज़िन्दा रह कर तरक़्क़ी करेगा, और रब तेरा ख़ुदा तुझे उस मुल्क में बरकत देगा जिस में तू दाख़िल होने वाला है।

17लेकिन अगर तेरा दिल इस रास्ते से हट कर नाफ़रमानी करे तो बरकत की तवक़्क़ो न कर। अगर तू आज़माइश में पड़ कर दीगर माबूदों को सिज्दा और उन की ख़िदमत करे

18तो तुम ज़रूर तबाह हो जाओगे। आज मैं एलान करता हूँ कि इस सूरत में तुम ज़्यादा देर तक उस मुल्क में आबाद नहीं रहोगे जिस में तू दरया-ए-यर्दन को पार करके दाख़िल होगा ताकि उस पर क़ब्ज़ा करे।

19आज आसमान और ज़मीन तुम्हारे ख़िलाफ़ मेरे गवाह हैं कि मैं ने तुम्हें ज़िन्दगी और बरकतों का रास्ता और मौत और लानतों का रास्ता पेश किया है। अब ज़िन्दगी का रास्ता इख़तियार कर ताकि तू और तेरी औलाद ज़िन्दा रहे।

20रब अपने ख़ुदा को प्यार कर, उस की सुन और उस से लिपटा रह। क्यूँकि वही तेरी ज़िन्दगी है और वही करेगा कि तू देर तक उस मुल्क में जीता रहेगा जिस का वादा उस ने क़सम खा कर तेरे बापदादा इब्राहीम, इस्हाक़ और याक़ूब से किया था।”