मूसा क़बीलों को बरकत देता है
1मरने से पेशतर मर्द-ए-ख़ुदा मूसा ने इस्राईलियों को बरकत दे कर
2कहा,
3यक़ीनन वह क़ौमों से मुहब्बत करता है, तमाम मुक़द्दसीन तेरे हाथ में हैं। वह तेरे पाँओ के सामने झुक कर तुझ से हिदायत पाते हैं।
4मूसा ने हमें शरीअत दी यानी वह चीज़ जो याक़ूब की जमाअत की मौरूसी मिलकियत है।
5इस्राईल के राहनुमा अपने क़बीलों समेत जमा हुए तो रब यसूरून
6रूबिन की बरकत :
7यहूदाह की बरकत :
8लावी की बरकत :
9उस ने तेरा कलाम सँभाल कर तेरा अह्द क़ाइम रखा, यहाँ तक कि उस ने न अपने माँ-बाप का, न अपने सगे भाइयों या बच्चों का लिहाज़ किया।
10वह याक़ूब को तेरी हिदायात और इस्राईल को तेरी शरीअत सिखा कर तेरे सामने बख़ूर और तेरी क़ुर्बानगाह पर भस्म होने वाली क़ुर्बानियाँ चढ़ाता है।
11ऐ रब, उस की ताक़त को बढ़ा कर उस के हाथों का काम पसन्द कर। उस के मुख़ालिफ़ों की कमर तोड़ और उस से नफ़रत रखने वालों को ऐसा मार कि आइन्दा कभी न उठें।
12बिनयमीन की बरकत :
13यूसुफ़ की बरकत :
14यूसुफ़ को सूरज की बेहतरीन पैदावार और हर महीने का लज़ीज़तरीन फल हासिल हो।
15उसे क़दीम पहाड़ों और अबदी वादियों की बेहतरीन चीज़ों से नवाज़ा जाए।
16ज़मीन के तमाम ज़ख़ीरे उस के लिए खुल जाएँ। वह उस को पसन्द हो जो जलती हुई झाड़ी में सुकूनत करता था। यह तमाम बरकतें यूसुफ़ के सर पर ठहरें, उस के सर पर जो अपने भाइयों में शहज़ादा है।
17यूसुफ़ साँड के पहलौठे जैसा अज़ीम है, और उस के सींग जंगली बैल के सींग हैं जिन से वह दुनिया की इन्तिहा तक सब क़ौमों को मारेगा। इफ़्राईम के बेशुमार अफ़राद ऐसे ही हैं, मनस्सी के हज़ारों अफ़राद ऐसे ही हैं।
18ज़बूलून और इश्कार की बरकत :
19वह दीगर क़ौमों को अपने पहाड़ पर आने की दावत देंगे और वहाँ रास्ती की क़ुर्बानियाँ पेश करेंगे। वह समुन्दर की कस्रत और समुन्दर की रेत में छुपे हुए ख़ज़ानों को जज़ब कर लेंगे।
20जद की बरकत :
21उस ने अपने लिए सब से अच्छी ज़मीन चुन ली, राहनुमा का हिस्सा उसी के लिए मह्फ़ूज़ रखा गया। जब क़ौम के राहनुमा जमा हुए तो उस ने रब की रास्त मर्ज़ी पूरी की और इस्राईल के बारे में उस के फ़ैसले अमल में लाया।
22दान की बरकत :
23नफ़्ताली की बरकत :
24आशर की बरकत :
25तेरे शहरों के दरवाज़ों के कुंडे लोहे और पीतल के हों, तेरी ताक़त उम्र भर क़ाइम रहे।
26यसूरून
27अज़ली ख़ुदा तेरी पनाहगाह है, वह अपने अज़ली बाज़ू तेरे नीचे फैलाए रखता है। वह दुश्मन को तेरे सामने से भगा कर उसे हलाक करने को कहता है।
28चुनाँचे इस्राईल सलामती से ज़िन्दगी गुज़ारेगा, याक़ूब का चश्मा अलग और मह्फ़ूज़ रहेगा। उस की ज़मीन अनाज और अंगूर की कस्रत पैदा करेगी, और उस के ऊपर आसमान ज़मीन पर ओस पड़ने देगा।
29ऐ इस्राईल, तू कितना मुबारक है। कौन तेरी मानिन्द है, जिसे रब ने बचाया है। वह तेरी मदद की ढाल और तेरी शान की तलवार है। तेरे दुश्मन शिकस्त खा कर तेरी ख़ुशामद करेंगे, और तू उन की कमरें पाँओ तले कुचलेगा।”