अज़्रा 3:1-13 DGV - Bible AI

नई क़ुर्बानगाह पर क़ुर्बानियाँ

1सातवें महीने की इब्तिदा में पूरी क़ौम यरूशलम में जमा हुई। उस वक़्त इस्राईली अपनी आबादियों में दुबारा आबाद हो गए थे।

2जमा होने का मक़्सद इस्राईल के ख़ुदा की क़ुर्बानगाह को नए सिरे से तामीर करना था ताकि मर्द-ए-ख़ुदा मूसा की शरीअत के मुताबिक़ उस पर भस्म होने वाली क़ुर्बानियाँ पेश की जा सकें। चुनाँचे यशूअ बिन यूसदक़ और ज़रुब्बाबल बिन सियाल्तीएल काम में लग गए। यशूअ के इमाम भाइयों और ज़रुब्बाबल के भाइयों ने उन की मदद की।

3गो वह मुल्क में रहने वाली दीगर क़ौमों से सहमे हुए थे ताहम उन्हों ने क़ुर्बानगाह को उस की पुरानी बुन्याद पर तामीर किया और सुब्ह-शाम उस पर रब को भस्म होने वाली क़ुर्बानियाँ पेश करने लगे।

4झोंपड़ियों की ईद उन्हों ने शरीअत की हिदायत के मुताबिक़ मनाई। उस हफ़्ते के हर दिन उन्हों ने भस्म होने वाली उतनी क़ुर्बानियाँ चढ़ाईं जितनी ज़रूरी थीं।

5उस वक़्त से इमाम भस्म होने वाली तमाम दरकार क़ुर्बानियाँ बाक़ाइदगी से पेश करने लगे, नीज़ नए चाँद की ईदों और रब की बाक़ी मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस ईदों की क़ुर्बानियाँ। क़ौम अपनी ख़ुशी से भी रब को क़ुर्बानियाँ पेश करती थी।

6गो रब के घर की बुन्याद अभी डाली नहीं गई थी तो भी इस्राईली सातवें महीने के पहले दिन से रब को भस्म होने वाली क़ुर्बानियाँ पेश करने लगे।

7फिर उन्हों ने राजों और कारीगरों को पैसे दे कर काम पर लगाया और सूर और सैदा के बाशिन्दों से देवदार की लकड़ी मंगवाई। यह लकड़ी लुबनान के पहाड़ी इलाक़े से समुन्दर तक लाई गई और वहाँ से समुन्दर के रास्ते याफ़ा पहुँचाई गई। इस्राईलियों ने मुआवज़े में खाने-पीने की चीज़ें और ज़ैतून का तेल दे दिया। फ़ारस के बादशाह ख़ोरस ने उन्हें यह करवाने की इजाज़त दी थी।

रब के घर की तामीर-ए-नौ

8जिलावतनी से वापस आने के दूसरे साल के दूसरे महीने में रब के घर की नए सिरे से तामीर शुरू हुई। इस काम में ज़रुब्बाबल बिन सियाल्तीएल, यशूअ बिन यूसदक़, दीगर इमाम और लावी और वतन में वापस आए हुए बाक़ी तमाम इस्राईली शरीक हुए। तामीरी काम की निगरानी उन लावियों के ज़िम्मे लगा दी गई जिन की उम्र 20 साल या इस से ज़ाइद थी।

9ज़ैल के लोग मिल कर रब का घर बनाने वालों की निगरानी करते थे : यशूअ अपने बेटों और भाइयों समेत, क़दमीएल और उस के बेटे जो हूदावियाह की औलाद थे और हनदाद के ख़ानदान के लावी।

10रब के घर की बुन्याद रखते वक़्त इमाम अपने मुक़द्दस लिबास पहने हुए साथ खड़े हो गए और तुरम बजाने लगे। आसफ़ के ख़ानदान के लावी साथ साथ झाँझ बजाने और रब की सताइश करने लगे। सब कुछ इस्राईल के बादशाह दाऊद की हिदायात के मुताबिक़ हुआ।

11वह हम्द-ओ-सना के गीत से रब की तारीफ़ करने लगे, “वह भला है, और इस्राईल पर उस की शफ़्क़त अबदी है!” जब हाज़िरीन ने देखा कि रब के घर की बुन्याद रखी जा रही है तो सब रब की ख़ुशी में ज़ोरदार नारे लगाने लगे।

12लेकिन बहुत से इमाम, लावी और ख़ानदानी सरपरस्त हाज़िर थे जिन्हों ने रब का पहला घर देखा हुआ था। जब उन के देखते देखते रब के नए घर की बुन्याद रखी गई तो वह बुलन्द आवाज़ से रोने लगे जबकि बाक़ी बहुत सारे लोग ख़ुशी के नारे लगा रहे थे।

13इतना शोर था कि ख़ुशी के नारों और रोने की आवाज़ों में इम्तियाज़ न किया जा सका। शोर दूर दूर तक सुनाई दिया।