रब का फ़रिश्ता इस्राईल को मलामत करता है
1रब का फ़रिश्ता जिल्जाल से चढ़ कर बोकीम पहुँचा। वहाँ उस ने इस्राईलियों से कहा, “मैं तुम्हें मिस्र से निकाल कर उस मुल्क में लाया जिस का वादा मैं ने क़सम खा कर तुम्हारे बापदादा से किया था। उस वक़्त मैं ने कहा कि मैं तुम्हारे साथ अपना अह्द कभी नहीं तोड़ूँगा।
2और मैं ने हुक्म दिया, ‘इस मुल्क की क़ौमों के साथ अह्द मत बांधना बल्कि उन की क़ुर्बानगाहों को गिरा देना।’ लेकिन तुम ने मेरी न सुनी। यह तुम ने क्या किया?
3इस लिए अब मैं तुम्हें बताता हूँ कि मैं उन्हें तुम्हारे आगे से नहीं निकालूँगा। वह तुम्हारे पहलूओं में काँटे बनेंगे, और उन के देवता तुम्हारे लिए फंदा बने रहेंगे।”
4रब के फ़रिश्ते की यह बात सुन कर इस्राईली ख़ूब रोए।
5यही वजह है कि उस जगह का नाम बोकीम यानी रोने वाले पड़ गया। फिर उन्हों ने वहाँ रब के हुज़ूर क़ुर्बानियाँ पेश कीं।
इस्राईल बेवफ़ा हो जाता है
6यशूअ के क़ौम को रुख़्सत करने के बाद हर एक क़बीला अपने इलाक़े पर क़ब्ज़ा करने के लिए रवाना हुआ था।
7जब तक यशूअ और वह बुज़ुर्ग ज़िन्दा रहे जिन्हों ने वह अज़ीम काम देखे हुए थे जो रब ने इस्राईलियों के लिए किए थे उस वक़्त तक इस्राईली रब की वफ़ादारी से ख़िदमत करते रहे।
8फिर रब का ख़ादिम यशूअ बिन नून इन्तिक़ाल कर गया। उस की उम्र 110 साल थी।
9उसे तिम्नत-हरिस में उस की अपनी मौरूसी ज़मीन में दफ़नाया गया। (यह शहर इफ़्राईम के पहाड़ी इलाक़े में जास पहाड़ के शिमाल में है।)
10जब हमअसर इस्राईली सब मर कर अपने बापदादा से जा मिले तो नई नस्ल उभर आई जो न तो रब को जानती, न उन कामों से वाक़िफ़ थी जो रब ने इस्राईल के लिए किए थे।
11उस वक़्त वह ऐसी हरकतें करने लगे जो रब को बुरी लगीं। उन्हों ने बाल देवता के बुतों की पूजा करके
12रब अपने बापदादा के ख़ुदा को तर्क कर दिया जो उन्हें मिस्र से निकाल लाया था। वह गिर्द-ओ-नवाह की क़ौमों के दीगर माबूदों के पीछे लग गए और उन की पूजा भी करने लगे। इस से रब का ग़ज़ब उन पर भड़का,
13क्यूँकि उन्हों ने उस की ख़िदमत छोड़ कर बाल देवता और अस्तारात देवी की पूजा की।
14रब यह देख कर इस्राईलियों से नाराज़ हुआ और उन्हें डाकुओं के हवाले कर दिया जिन्हों ने उन का माल लूटा। उस ने उन्हें इर्दगिर्द के दुश्मनों के हाथ बेच डाला, और वह उन का मुक़ाबला करने के क़ाबिल न रहे।
15जब भी इस्राईली लड़ने के लिए निकले तो रब का हाथ उन के ख़िलाफ़ था। नतीजतन वह हारते गए जिस तरह उस ने क़सम खा कर फ़रमाया था।
16तो रब उन के दरमियान क़ाज़ी बरपा करता जो उन्हें लूटने वालों के हाथ से बचाते।
17लेकिन वह उन की न सुनते बल्कि ज़िना करके दीगर माबूदों के पीछे लगे और उन की पूजा करते रहते। गो उन के बापदादा रब के अह्काम के ताबे रहे थे, लेकिन वह ख़ुद बड़ी जल्दी से उस राह से हट जाते जिस पर उन के बापदादा चले थे।
18लेकिन जब भी वह दुश्मन के ज़ुल्म और दबाओ तले कराहने लगते तो रब को उन पर तरस आ जाता, और वह किसी क़ाज़ी को बरपा करता और उस की मदद करके उन्हें बचाता।
19लेकिन उस के मरने पर वह दुबारा अपनी पुरानी राहों पर चलने लगते, बल्कि जब वह मुड़ कर दीगर माबूदों की पैरवी और पूजा करने लगते तो उन की रविश बापदादा की रविश से भी बुरी होती। वह अपनी शरीर हरकतों और हटधर्म राहों से बाज़ आने के लिए तय्यार ही न होते।
20इस लिए अल्लाह को इस्राईल पर बड़ा ग़ुस्सा आया। उस ने कहा, “इस क़ौम ने वह अह्द तोड़ दिया है जो मैं ने इस के बापदादा से बांधा था। यह मेरी नहीं सुनती,
21इस लिए मैं उन क़ौमों को नहीं निकालूँगा जो यशूअ की मौत से ले कर आज तक मुल्क में रह गई हैं। यह क़ौमें इस में आबाद रहेंगी,
22और मैं उन से इस्राईलियों को आज़मा कर देखूँगा कि आया वह अपने बापदादा की तरह रब की राह पर चलेंगे या नहीं।”
23चुनाँचे रब ने इन क़ौमों को न यशूअ के हवाले किया, न फ़ौरन निकाला बल्कि उन्हें मुल्क में ही रहने दिया।