मक़्दिस की मख़्सूसियत के हदिए
1जिस दिन मक़्दिस मुकम्मल हुआ उसी दिन मूसा ने उसे मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस किया। इस के लिए उस ने ख़ैमे, उस के तमाम सामान, क़ुर्बानगाह और उस के तमाम सामान पर तेल छिड़का।
2फिर क़बीलों के बारह सरदार मक़्दिस के लिए हदिए ले कर आए। यह वही राहनुमा थे जिन्हों ने मर्दुमशुमारी के वक़्त मूसा की मदद की थी। उन्हों ने छत वाली छ: बैल गाड़ियाँ और बारह बैल ख़ैमे के सामने रब को पेश किए, दो दो सरदारों की तरफ़ से एक बैलगाड़ी और हर एक सरदार की तरफ़ से एक बैल।
4रब ने मूसा से कहा,
5“यह तोह्फ़े क़बूल करके मुलाक़ात के ख़ैमे के काम के लिए इस्तेमाल कर। उन्हें लावियों में उन की ख़िदमत की ज़रूरत के मुताबिक़ तक़्सीम करना।”
6चुनाँचे मूसा ने बैल गाड़ियाँ और बैल लावियों को दे दिए।
7उस ने दो बैल गाड़ियाँ चार बैलों समेत जैर्सोनियों को
8और चार बैल गाड़ियाँ आठ बैलों समेत मिरारियों को दीं। मिरारी हारून इमाम के बेटे इतमर के तहत ख़िदमत करते थे।
9लेकिन मूसा ने क़िहातियों को न बैल गाड़ियाँ और न बैल दिए। वजह यह थी कि जो मुक़द्दस चीज़ें उन के सपुर्द थीं वह उन को कंधों पर उठा कर ले जानी थीं।
10बारह सरदार क़ुर्बानगाह की मख़्सूसियत के मौक़े पर भी हदिए ले आए। उन्हों ने अपने हदिए क़ुर्बानगाह के सामने पेश किए।
11रब ने मूसा से कहा, “सरदार बारह दिन के दौरान बारी बारी अपने हदिए पेश करें।”
12पहले दिन यहूदाह के सरदार नह्सोन बिन अम्मीनदाब की बारी थी। उस के हदिए यह थे :
13चाँदी का थाल जिस का वज़न डेढ़ किलोग्राम था और छिड़काओ का चाँदी का कटोरा जिस का वज़न 800 ग्राम था। दोनों ग़ल्ला की नज़र के लिए तेल के साथ मिलाए गए बेहतरीन मैदे से भरे हुए थे।
14इन के इलावा नह्सोन ने यह चीज़ें पेश कीं : सोने का प्याला जिस का वज़न 110 ग्राम था और जो बख़ूर से भरा हुआ था,
15एक जवान बैल, एक मेंढा, भस्म होने वाली क़ुर्बानी के लिए भेड़ का एक यकसाला बच्चा,
16गुनाह की क़ुर्बानी के लिए एक बकरा
17और सलामती की क़ुर्बानी के लिए दो बैल, पाँच मेंढे, पाँच बकरे और भेड़ के पाँच यकसाला बच्चे।
18अगले ग्यारह दिन बाक़ी सरदार भी यही हदिए मक़्दिस के पास ले आए। दूसरे दिन इश्कार के सरदार नतनीएल बिन ज़ुग़र की बारी थी,
24तीसरे दिन ज़बूलून के सरदार इलियाब बिन हेलोन की,
30चौथे दिन रूबिन के सरदार इलीसूर बिन शदियूर की, पाँचवें दिन शमाऊन के सरदार सलूमीएल बिन सूरीशद्दी की, छटे दिन जद के सरदार इलियासफ़ बिन दऊएल की,
48सातवें दिन इफ़्राईम के सरदार इलीसमा बिन अम्मीहूद की,
54आठवें दिन मनस्सी के सरदार जमलीएल बिन फ़दाह्सूर की, नवें दिन बिनयमीन के सरदार अबिदान बिन जिदाऊनी की, दसवें दिन दान के सरदार अख़ीअज़र बिन अम्मीशद्दी की,
72ग्यारहवें दिन आशर के सरदार फ़जईएल बिन अक्रान की और बारहवें दिन नफ़्ताली के सरदार अख़ीरा बिन एनान की बारी थी।
84इस्राईल के इन सरदारों ने मिल कर क़ुर्बानगाह की मख़्सूसियत के लिए चाँदी के 12 थाल, छिड़काओ के चाँदी के 12 कटोरे और सोने के 12 प्याले पेश किए।
85हर थाल का वज़न डेढ़ किलोग्राम और छिड़काओ के हर कटोरे का वज़न 800 ग्राम था। इन चीज़ों का कुल वज़न तक़रीबन 28 किलोग्राम था।
86बख़ूर से भरे हुए सोने के प्यालों का कुल वज़न तक़रीबन डेढ़ किलोग्राम था (फ़ी प्याला 110 ग्राम)।
87सरदारों ने मिल कर भस्म होने वाली क़ुर्बानी के लिए 12 जवान बैल, 12 मेंढे और भेड़ के 12 यकसाला बच्चे उन की ग़ल्ला की नज़रों समेत पेश किए। गुनाह की क़ुर्बानी के लिए उन्हों ने 12 बकरे पेश किए
88और सलामती की क़ुर्बानी के लिए 24 बैल, 60 मेंढे, 60 बकरे और भेड़ के 60 यकसाला बच्चे। इन तमाम जानवरों को क़ुर्बानगाह की मख़्सूसियत के मौक़े पर चढ़ाया गया।
89जब मूसा मुलाक़ात के ख़ैमे में रब के साथ बात करने के लिए दाख़िल होता था तो वह रब की आवाज़ अह्द के सन्दूक़ के ढकने पर से यानी दो करूबी फ़रिश्तों के दरमियान से सुनता था।