चार रथ
1मैं ने फिर अपनी निगाह उठाई तो क्या देखता हूँ कि चार रथ पीतल के दो पहाड़ों के बीच में से निकल रहे हैं।
2पहले रथ के घोड़े सुर्ख़, दूसरे के सियाह,
3तीसरे के सफ़ेद और चौथे के धब्बेदार थे। सब ताक़तवर थे।
4जो फ़रिश्ता मुझ से बात कर रहा था उस से मैं ने सवाल किया, “मेरे आक़ा, इन का क्या मतलब है?”
5उस ने जवाब दिया, “यह आसमान की चार रूहें
6सियाह घोड़ों का रथ शिमाली मुल्क की तरफ़ जा रहा है, सफ़ेद घोड़ों का मग़रिब की तरफ़, और धब्बेदार घोड़ों का जुनूब की तरफ़।”
7यह ताक़तवर घोड़े बड़ी बेताबी से इस इन्तिज़ार में थे कि दुनिया की गश्त करें। फिर उस ने हुक्म दिया, “चलो, दुनिया की गश्त करो।” वह फ़ौरन निकल कर दुनिया की गश्त करने लगे।
8फ़रिश्ते ने मुझे आवाज़ दे कर कहा, “उन घोड़ों पर ख़ास ध्यान दो जो शिमाली मुल्क की तरफ़ बढ़ रहे हैं। यह उस मुल्क पर मेरा ग़ुस्सा उतारेंगे।”
इस्राईल का आने वाला बादशाह
9रब का कलाम मुझ पर नाज़िल हुआ,
10“आज ही यूसियाह बिन सफ़नियाह के घर में जा! वहाँ तेरी मुलाक़ात बाबल में जिलावतन किए हुए इस्राईलियों ख़ल्दी, तूबियाह और यदायाह से होगी जो इस वक़्त वहाँ पहुँच चुके हैं। जो हदिए वह अपने साथ लाए हैं उन्हें क़बूल कर।
11उन की यह सोना-चाँदी ले कर ताज बना ले, फिर ताज को इमाम-ए-आज़म यशूअ बिन यहूसदक़ के सर पर रख कर
12उसे बता, ‘रब्ब-उल-अफ़्वाज फ़रमाता है कि एक आदमी आने वाला है जिस का नाम कोंपल है। उस के साय में बहुत कोंपलें फूट निकलेंगी, और वह रब का घर तामीर करेगा।
13हाँ, वही रब का घर बनाएगा और शान-ओ-शौकत के साथ तख़्त पर बैठ कर हुकूमत करेगा। वह इमाम की हैसियत से भी तख़्त पर बैठेगा, और दोनों उह्दों में इत्तिफ़ाक़ और सलामती होगी।’
14ताज को हीलम, तूबियाह, यदायाह और हेन बिन सफ़नियाह की याद में रब के घर में मह्फ़ूज़ रखा जाए।
15लोग दूरदराज़ इलाक़ों से आ कर रब का घर तामीर करने में मदद करेंगे।”