इन्सान का वफ़ादार मुहाफ़िज़
1ज़ियारत का गीत।
2मेरी मदद रब से आती है, जो आसमान-ओ-ज़मीन का ख़ालिक़ है।
3वह तेरा पाँओ फिसलने नहीं देगा। तेरा मुहाफ़िज़ ऊँघने का नहीं।
4यक़ीनन इस्राईल का मुहाफ़िज़ न ऊँघता है, न सोता है।
5रब तेरा मुहाफ़िज़ है, रब तेरे दहने हाथ पर सायबान है।
6न दिन को सूरज, न रात को चाँद तुझे ज़रर पहुँचाएगा।
7रब तुझे हर नुक़्सान से बचाएगा, वह तेरी जान को मह्फ़ूज़ रखेगा।
8रब अब से अबद तक तेरे आने जाने की पहरादारी करेगा।