ज़बूर 123:1-4 DGV - Bible AI

अल्लाह हम पर मेहरबानी करे

1ज़ियारत का गीत। मैं अपनी आँखों को तेरी तरफ़ उठाता हूँ, तेरी तरफ़ जो आसमान पर तख़्तनशीन है।

2जिस तरह ग़ुलाम की आँखें अपने मालिक के हाथ की तरफ़ और लौंडी की आँखें अपनी मालिकन के हाथ की तरफ़ लगी रहती हैं उसी तरह हमारी आँखें रब अपने ख़ुदा पर लगी रहती हैं, जब तक वह हम पर मेहरबानी न करे।

3ऐ रब, हम पर मेहरबानी कर, हम पर मेहरबानी कर! क्यूँकि हम हद से ज़्यादा हिक़ारत का निशाना बन गए हैं।

4सुकून से ज़िन्दगी गुज़ारने वालों की लान-तान और मग़रूरों की तह्क़ीर से हमारी जान दूभर हो गई है।