रब अपने क़ैदियों को रिहाई देता है
1ज़ियारत का गीत।
2तब हमारा मुँह हंसी-ख़ुशी से भर गया, और हमारी ज़बान शादमानी के नारे लगाने से रुक न सकी। तब दीगर क़ौमों में कहा गया, “रब ने उन के लिए ज़बरदस्त काम किया है।”
3रब ने वाक़ई हमारे लिए ज़बरदस्त काम किया है। हम कितने ख़ुश थे, कितने ख़ुश!
4ऐ रब, हमें बहाल कर। जिस तरह मौसम-ए-बरसात में दश्त-ए-नजब के ख़ुश्क नाले पानी से भर जाते हैं उसी तरह हमें बहाल कर।
5जो आँसू बहा बहा कर बीज बोएँ वह ख़ुशी के नारे लगा कर फ़सल काटेंगे।
6वह रोते हुए बीज बोने के लिए निकलेंगे, लेकिन जब फ़सल पक जाए तो ख़ुशी के नारे लगा कर पूले उठाए अपने घर लौटेंगे।