अल्लाह ही हमारा घर तामीर करता है
1सुलैमान का ज़ियारत का गीत।
2यह भी अबस है कि तुम सुब्ह-सवेरे उठो और पूरे दिन मेहनत-मशक़्क़त के साथ रोज़ी कमा कर रात गए सो जाओ। क्यूँकि जो अल्लाह को प्यारे हैं उन्हें वह उन की ज़रूरियात उन के सोते में पूरी कर देता है।
3बच्चे ऐसी नेमत हैं जो हम मीरास में रब से पाते हैं, औलाद एक अज्र है जो वही हमें देता है।
4जवानी में पैदा हुए बेटे सूरमे के हाथ में तीरों की मानिन्द हैं।
5मुबारक है वह आदमी जिस का तर्कश उन से भरा है। जब वह शहर के दरवाज़े पर अपने दुश्मनों से झगड़ेगा तो शर्मिन्दा नहीं होगा।