मदद के लिए दुआ
1दाऊद का ज़बूर। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए।
2मेरी जान कब तक परेशानियों में मुब्तला रहे, मेरा दिल कब तक रोज़-ब-रोज़ दुख उठाता रहे? मेरा दुश्मन कब तक मुझ पर ग़ालिब रहेगा?
3ऐ रब मेरे ख़ुदा, मुझ पर नज़र डाल कर मेरी सुन! मेरी आँखों को रौशन कर, वर्ना मैं मौत की नींद सो जाऊँगा।
4तब मेरा दुश्मन कहेगा, “मैं उस पर ग़ालिब आ गया हूँ!” और मेरे मुख़ालिफ़ शादियाना बजाएंगे कि मैं हिल गया हूँ।
5लेकिन मैं तेरी शफ़्क़त पर भरोसा रखता हूँ, मेरा दिल तेरी नजात देख कर ख़ुशी मनाएगा।
6मैं रब की तम्जीद में गीत गाऊँगा, क्यूँकि उस ने मुझ पर एह्सान किया है।