मदद के लिए दुआ और जवाब के लिए शुक्रगुज़ारी
1दाऊद का ज़बूर।
2मेरी इल्तिजाएँ सुन जब मैं चीख़ते चिल्लाते तुझ से मदद माँगता हूँ, जब मैं अपने हाथ तेरी सुकूनतगाह के मुक़द्दसतरीन कमरे की तरफ़ उठाता हूँ।
3मुझे उन बेदीनों के साथ घसीट कर सज़ा न दे जो ग़लत काम करते हैं, जो अपने पड़ोसियों से बज़ाहिर दोस्ताना बातें करते, लेकिन दिल में उन के ख़िलाफ़ बुरे मन्सूबे बांधते हैं।
4उन्हें उन की हरकतों और बुरे कामों का बदला दे। जो कुछ उन के हाथों से सरज़द हुआ है उस की पूरी सज़ा दे। उन्हें उतना ही नुक़्सान पहुँचा दे जितना उन्हों ने दूसरों को पहुँचाया है।
5क्यूँकि न वह रब के आमाल पर, न उस के हाथों के काम पर तवज्जुह देते हैं। अल्लाह उन्हें ढा देगा और दुबारा कभी तामीर नहीं करेगा।
6रब की तम्जीद हो, क्यूँकि उस ने मेरी इल्तिजा सुन ली।
7रब मेरी क़ुव्वत और मेरी ढाल है। उस पर मेरे दिल ने भरोसा रखा, उस से मुझे मदद मिली है। मेरा दिल शादियाना बजाता है, मैं गीत गा कर उस की सताइश करता हूँ।
8रब अपनी क़ौम की क़ुव्वत और अपने मसह किए हुए ख़ादिम का नजातबख़्श क़िला है।
9ऐ रब, अपनी क़ौम को नजात दे! अपनी मीरास को बरकत दे! उन की गल्लाबानी करके उन्हें हमेशा तक उठाए रख।