रब के जलाल की तम्जीद
1दाऊद का ज़बूर।
2रब के नाम को जलाल दो। मुक़द्दस लिबास से आरास्ता हो कर रब को सिज्दा करो।
3रब की आवाज़ समुन्दर के ऊपर गूँजती है। जलाल का ख़ुदा गरजता है, रब गहरे पानी के ऊपर गरजता है।
4रब की आवाज़ ज़ोरदार है, रब की आवाज़ पुरजलाल है।
5रब की आवाज़ देवदार के दरख़्तों को तोड़ डालती है, रब लुबनान के देवदार के दरख़्तों को टुकड़े टुकड़े कर देता है।
6वह लुबनान को बछड़े और कोह-ए-सिर्यून
7रब की आवाज़ आग के शोले भड़का देती है।
8रब की आवाज़ रेगिस्तान को हिला देती है, रब दश्त-ए-क़ादिस को काँपने देता है।
9रब की आवाज़ सुन कर हिरनी दर्द-ए-ज़ह में मुब्तला हो जाती और जंगलों के पत्ते झड़ जाते हैं। लेकिन उस की सुकूनतगाह में सब पुकारते हैं, “जलाल!”
10रब सैलाब के ऊपर तख़्तनशीन है, रब बादशाह की हैसियत से अबद तक तख़्तनशीन है।
11रब अपनी क़ौम को तक़वियत देगा, रब अपने लोगों को सलामती की बरकत देगा।