ज़बूर 40:1-17 DGV - Bible AI

शुक्र और दरख़्वास्त

1दाऊद का ज़बूर। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। मैं सब्र से रब के इन्तिज़ार में रहा तो वह मेरी तरफ़ माइल हुआ और मदद के लिए मेरी चीख़ों पर तवज्जुह दी।

2वह मुझे तबाही के गढ़े से खैंच लाया, दलदल और कीचड़ से निकाल लाया। उस ने मेरे पाँओ को चटान पर रख दिया, और अब मैं मज़बूती से चल फिर सकता हूँ।

3उस ने मेरे मुँह में नया गीत डाल दिया, हमारे ख़ुदा की हम्द-ओ-सना का गीत उभरने दिया। बहुत से लोग यह देखेंगे और ख़ौफ़ खा कर रब पर भरोसा रखेंगे।

4मुबारक है वह जो रब पर पूरा भरोसा रखता है, जो तंग करने वालों और फ़रेब में उलझे हुओं की तरफ़ रुख़ नहीं करता।

5ऐ रब मेरे ख़ुदा, बार बार तू ने हमें अपने मोजिज़े दिखाए, जगह-ब-जगह अपने मन्सूबे वुजूद में ला कर हमारी मदद की। तुझ जैसा कोई नहीं है। तेरे अज़ीम काम बेशुमार हैं, मैं उन की पूरी फ़हरिस्त बता भी नहीं सकता।

6तू क़ुर्बानियाँ और नज़रें नहीं चाहता था, लेकिन तू ने मेरे कानों को खोल दिया। तू ने भस्म होने वाली क़ुर्बानियों और गुनाह की क़ुर्बानियों का तक़ाज़ा न किया।

7फिर मैं बोल उठा, “मैं हाज़िर हूँ जिस तरह मेरे बारे में कलाम-ए-मुक़द्दस[५] में लिखा है।

8ऐ मेरे ख़ुदा, मैं ख़ुशी से तेरी मर्ज़ी पूरी करता हूँ, तेरी शरीअत मेरे दिल में टिक गई है।”

9मैं ने बड़े इजतिमा में रास्ती की ख़ुशख़बरी सुनाई है। ऐ रब, यक़ीनन तू जानता है कि मैं ने अपने होंटों को बन्द न रखा।

10मैं ने तेरी रास्ती अपने दिल में छुपाए न रखी बल्कि तेरी वफ़ादारी और नजात बयान की। मैं ने बड़े इजतिमा में तेरी शफ़्क़त और सदाक़त की एक बात भी पोशीदा न रखी।

11ऐ रब, तू मुझे अपने रहम से महरूम नहीं रखेगा, तेरी मेहरबानी और वफ़ादारी मुसलसल मेरी निगहबानी करेंगी।

12क्यूँकि बेशुमार तकलीफ़ों ने मुझे घेर रखा है, मेरे गुनाहों ने आख़िरकार मुझे आ पकड़ा है। अब मैं नज़र भी नहीं उठा सकता। वह मेरे सर के बालों से ज़्यादा हैं, इस लिए मैं हिम्मत हार गया हूँ।

13ऐ रब, मेहरबानी करके मुझे बचा! ऐ रब, मेरी मदद करने में जल्दी कर!

14मेरे जानी दुश्मन सब शर्मिन्दा हो जाएँ, उन की सख़्त रुस्वाई हो जाए। जो मेरी मुसीबत देखने से लुत्फ़ उठाते हैं वह पीछे हट जाएँ, उन का मुँह काला हो जाए।

15जो मेरी मुसीबत देख कर क़ह्क़हा लगाते हैं वह शर्म के मारे तबाह हो जाएँ।

16लेकिन तेरे तालिब शादमान हो कर तेरी ख़ुशी मनाएँ। जिन्हें तेरी नजात प्यारी है वह हमेशा कहें, “रब अज़ीम है!”

17मैं नाचार और ज़रूरतमन्द हूँ, लेकिन रब मेरा ख़याल रखता है। तू ही मेरा सहारा और मेरा नजातदहिन्दा है। ऐ मेरे ख़ुदा, देर न कर!