ज़ुल्म के बावुजूद तसल्ली
1दाऊद का ज़बूर। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। हिक्मत का यह गीत उस वक़्त से मुताल्लिक़ है जब दोएग अदोमी साऊल बादशाह के पास गया और उसे बताया, “दाऊद अख़ीमलिक इमाम के घर में गया है।”
2ऐ धोकेबाज़, तेरी ज़बान तेज़ उस्तरे की तरह चलती हुई तबाही के मन्सूबे बांधती है।
3तुझे भलाई की निस्बत बुराई ज़्यादा प्यारी है, सच बोलने की निस्बत झूट ज़्यादा पसन्द है। (सिलाह)
4ऐ फ़रेबदिह ज़बान, तू हर तबाहकुन बात से प्यार करती है।
5लेकिन अल्लाह तुझे हमेशा के लिए ख़ाक में मिलाएगा। वह तुझे मार मार कर तेरे ख़ैमे से निकाल देगा, तुझे जड़ से उखाड़ कर ज़िन्दों के मुल्क से ख़ारिज कर देगा। (सिलाह)
6रास्तबाज़ यह देख कर ख़ौफ़ खाएँगे। वह उस पर हंस कर कहेंगे,
7“लो, यह वह आदमी है जिस ने अल्लाह में पनाह न ली बल्कि अपनी बड़ी दौलत पर एतिमाद किया, जो अपने तबाहकुन मन्सूबों से ताक़तवर हो गया था।”
8लेकिन मैं अल्लाह के घर में ज़ैतून के फलते फूलते दरख़्त की मानिन्द हूँ। मैं हमेशा के लिए अल्लाह की शफ़्क़त पर भरोसा रखूँगा।
9मैं अबद तक उस के लिए तेरी सताइश करूँगा जो तू ने किया है। मैं तेरे ईमानदारों के सामने ही तेरे नाम के इन्तिज़ार में रहूँगा, क्यूँकि वह भला है।